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चार साल से बंद पड़ी टायो रोल्स कंपनी, को 684 लाख का मुनाफा

कुणाल सारंगी

सरायकेला में गम्हरिया में अवस्थित टायो कंपनी ने पिछले चार साल से बंद होने के बाद भी 684 लाख का मुनाफा दिखाया है. इसका खुलासा ऑडिट रिपोर्ट से हुआ है. वहीं, इस मामले को टायो संघर्ष समिति के सदस्यों ने गंभीरता से लिया है

सरायकेला: जिले में गम्हरिया में अवस्थित( )टायो कंपनी ने पिछले चार साल से बंद होने के बाद भी 684 लाख का मुनाफा दिखाया है जिसका खुलासा झारखंड वाणी ने 29 जून के  रिपोर्ट में किया था. अब इस सनसनीखेज मामले का रहस्योद्घाटन खुद कंपनी की रब्स एंड कंपनी की ऑडिट रिपोर्ट से हुआ है. आर.पी. अनीश अग्रवाल द्वारा जारी वर्ष 2019-2020 की चौथी तिमाही की वित्तीय रिपोर्ट में 684 लाख का मुनाफा दिखाए जाने के मामले को टायो संघर्ष समिति के सदस्यों ने गंभीरता से लिया है. समिति के संयोजक अजय शर्मा ने कहा कि टायो कंपनी वर्ष 2016 से बंद पड़ी है. इसके कुछ कर्मचारी कंपनी द्वारा जारी विभिन्न स्कीम को लेकर छोड़ चुके हैं, जबकि कुछ बंदी के विरोध में आज भी आंदोलन कर रहे हैं. इसी संबंध में विभिन्न मामले भिन्न न्यायालयों में लंबित हैं शर्मा ने कहा कि कंपनी को एनसीएलटी के द्वारा अप्रैल 2019 में सेक्शन 9 (आईपीसी) के तहत सीआईआरपी में मंजूर किया गया और विनीता अग्रवाल को हटाकर उनकी जगह अनीश अग्रवाल को आरपी नियुक्त कर दिया. अग्रवाल के प्रभाव में आते ही कई ऐसे कदम उठाए गए हैं, जो एक पक्षीय प्रतीत होता है. शर्मा ने बताया कि बीएसई में दायर किए गए पिछले तिमाही और वित्त वर्ष 2019-2020 के परिणाम में रेसोल्यूशन प्रोफेशनल (RP) द्वारा मुनाफा दिखाया गया है. इसमें 684 लाख का लाभ दिखाया गया है. इस वित्तीय कारीगरी के परिणाम तक पहुंचने में पिछली तिमाहियों में दर्शाए गए खर्चों को उलट दिया गया है, ताकि अंतिम तिमाही में अधिक लाभ दिखाया जा सके.

वित्तीय लाभ का मामला संज्ञान में आने पर टायो संघर्ष समिति ने गंभीरता से लिया है. सदस्यों ने बताया कि इसमें लाभ की जो जानकारी सेबी को दी गई है, प्रथम दृष्टया मानवीय भूल भी हो सकती है. लेकिन टायो रोल्स की ओर से अभी तक कोई खंडन नहीं किए जाने से यह मामला गंभीर बन गया है. उन्होंने कहा कि 2016 अक्तूबर से गैरकानूनी तरीके से बंद की गई कंपनी को 684 लाख का वित्तीय लाभ 2019-20 के अन्तिम तिमाही में दिखाना कई सवालों को जन्म दे दिया है. उन्होंने कहा कि ये लाभ कहां से हो गया. इस मामले को न्यायालय को भी देखना होगा, ताकि इसकी सत्यता की पुष्टि हो सके.

रब्स एंड कंपनी जो टायो के नए ऑडिटर हैं, उन्होंने अपने नोट में बताया है कि वित्तीय परिणाम इंडस निर्देशों के अनुसार बनाए गए हैं. ऑडिटर ने बताया है कि एक रेसोल्यूशन योजना एनसीएलटी में दाखिल किया गया है, जिसकी अभी वहां से मंजूरी मिलनी बाकी हैं, लेकिन सारे परिणाम को ऐसे मानकर प्रकाशित किया गया है मानो न्यायाधिकरण से मंजूरी मिल गई है. हालांकि ऐसा मानने का कोई औचित्य नहीं है और यह ऑडिटर की निष्पक्षता पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है.रब्स एंड कंपनी ने अपनी रिपोर्ट के चौथे बिंदु पर बताया है कि चौथी तिमाही में कोरोना के चलते कंपनी के काम काज पर भारी मुसीबत पड़ी है. यह आश्चर्य की बात है कि बंद कंपनी में कोरोना ऐसी क्या आफत पड़ गई. कोरोना के चलते कंपनी में परिसंपत्तियों का मूल्यांकन नहीं किया गया है. ऑडिटर ने यह भी कहा है कि आर्थिक मंदी और पूंजी की महामारी के चलते टायो की नेटवर्थ में गिरावट दर्ज की गई है