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Covid-19:वायरस से ठीक होने पर भी वर्षों तक शरीर के इन अंगों पर बना रहेगा असर, शोध में खुलासा

कुणाल सारंगी

कोरोना वायरस की जंग जीतने वाले मरीजों को वर्षों तक इसका दुष्परिणाम झेलना पड़ेगा। ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने यह दावा किया है। उनका कहना है कि वायरस का असर शरीर के लगभग हर बड़े अंग पर बना रहेगा, जिससे आने वाले सालों में मरीजों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। अपने दावे की हकीकत जांचने के लिए वैज्ञानिक अगले 25 साल तक 10 हजार ऐसे लोगों के स्वास्थ्य की निगरानी करेंगे।

गुर्दा : कोरोना की चपेट में आते ही असर
रक्त की सफाई करने वाला गुर्दा कोरोना वायरस के हमले से सबसे पहले खराब होना शुरू होता है। अध्ययनों में पाया गया अस्पताल में भर्ती होने वाले एक-तिहाई मरीजों के गुर्दे में आंशिक या गंभीर असर होने लगते हैं। आने वाले समय में कई मरीजों को डायलिसिस या दीर्घकाल में गुर्दा प्रत्यारोपण भी कराना पड़ सकता है।

दिल : आधे से ज्यादा मरीजों में बना रहेगा खतरा
कोरोना मरीज के फेफड़ों पर गहरा असर पड़ता है। एडिनबर्ग विश्वविद्यालय ने 69 देशों के 1200 मरीजों पर अध्ययन में पाया कि इनमें 55 फीसदी मरीजों के हृदय में असामानताएं दिखीं। 15 फीसदी मरीजों के शरीर में हृदय के रक्त पंप करने के तरीके में ही बदलाव हो गया। आगे कई वर्षों तक दिक्कतें हो सकती हैं।

मस्तिष्क : न्यूरोलॉजी से जुड़े असर दिखते रहेंगे
ऐसे मरीजों के मस्तिष्क में असर पड़ता है जो समय के साथ और गंभीर हो सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि कोरोना मरीजों में 50 प्रतिशत को न्यूरोलॉजिकल असर होते हैं। इन्हें भविष्य में सिर दर्द, स्वाद न पता लगने और शरीर में झुनझुनाहट जैसे हल्के लक्षण महसूस हो सकते हैं। साथ ही न्यूरो से जुड़े गंभीर असर भी हो सकते हैं, जिसमें स्ट्रोक , दौरे पड़ना और बोलने की क्षमता कम या खत्म हो जाना प्रमुख हैं।

सभी अंगों तक सीधे असर करता है कोरोना

किंग्स कालेज लंदन के ताजा शोध का दावा है कि वायरस पीड़ित के ठीक होने के तीन माह बाद ही एंटीबॉडी में गिरावट आने लगती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इंसानी शरीर की अलग-अलग तरह की कोशिकाओं की सतह पर एसीई-2 रिसेप्टर होते हैं।

ये रिसेप्टर कोरोना वायरस के स्पाइक प्रोटीन के लिए प्रवेशद्वार की तरह हैं। जिनसे जुड़कर स्पाइक उस कोशिका में वायरस की संख्या बढ़ाने लगता है। यही कारण है कि सिर्फ फेफड़ा ही नहीं, अन्य कई महत्वपूर्ण अंगों तक वायरस का सीधा असर पहुंचता है।