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झारखंड सरकार  ने अटल जी का अनादर कर अस्वस्थ्य और शर्मनाक परंपरा का आगाज़ किया : कुणाल षाड़ंगी

कुणाल सारंगी

जमशेदपुर। अलग झारखंड राज्य की माँग को मूर्त रूप देने वाले दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को झारखंड सरकार ने भुला दिया। अटल जी की पुण्यतिथि पर झारखंड में यूपीए गठबंधन की सरकार ने पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि अर्पित करना भी जरूरी नहीं समझा। सूबे के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ट्वीट कर के महज़ औपचारिकता पूरा किया लेकिन झारखंड विधानसभा परिसर स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण करना झारखंड सरकार ने जरूरी नहीं समझा। वहीं भाजपा के राज्यसभा सांसद समीर उराँव सहित अन्य पदाधिकारियों को भी माल्यार्पण की अनुमति से वंचित रखा गया। दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी की उपेक्षा से बिफरी भाजपा ने इसकी तीव्र भर्त्सना की है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता और पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी ने इस मामले पर झारखंड सरकार और विधानसभा सचिवालय की निंदा करते हुए कहा कि राज्य की यूपीए गठबंधन की सरकार ने अस्वस्थ्य और शर्मनाक परंपरा की शुरुआत की है। कहा कि श्रद्धेय अटल जी के हस्ताक्षर से झारखंड राज्य बना। वे राजनीति के वैचारिक मतभेदों से ऊपर हैं। लेकिन विधानसभा परिसर स्थित उनकी प्रतिमा पर आज सरकार द्वारा माल्यार्पण तक नहीं की गई। वहीं राज्यसभा सांसद समीर उरांव सहित प्रदेश भाजपा के पदाधिकारियों को भी माल्यार्पण करने की अनुमति से वंचित रखा गया। सरकार की आलोचना करते हुए प्रदेश प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी ने कहा कि यह शर्मनाक परंपरा की शुरुआत है जिसे लोकतंत्र के लिए उत्साहवर्धक नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कई उदाहरण प्रस्तुत करते कहा कि अटल जी देश के सर्वमान्य नेता थें और सुचितापूर्ण राजनीति में आस्था रखतें थे। बतौर प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के हस्ताक्षर से ही अलग झारखंड राज्य निर्माण का सपना पूर्ण हो सका। भाजपा ने कहा कि वर्तमान यूपीए गठबंधन की सरकार ने वाजपेयी जी के योगदानों को भुला कर उनका अपमान किया है। भाजपा प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी ने मुख्यमंत्री और राज्य सरकार के कैबिनेट मंत्रियों को निशाने पर लेते हुए कहा इस अस्वस्थ्य परंपरा की सराहना नहीं कि जा सकती। कहा कि मतों के अंतर को वर्तमान सरकार ने ‘मन का अंतर’ में बदल दिया है। झारखंड सरकार और विधानसभा सचिवालय को यह सुनिश्चित करनी चाहिए कि इस प्रकार के शर्माक परंपरा और व्यवहार की कभी पुनरावृत्ति नहीं हो।