झारखण्ड वाणी

सच सोच और समाधान

यारों! कहाँ खड़ा अब देश?

Ambuj Kumar Kunal Sarangi width Anshar Khan ADJ Kamlesh Jitendra Rais Rozvi Rishi Mishra Rina Gupta

यारों! कहाँ खड़ा अब देश?
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जहाँ पे चोरी करे सिपाही, मुजरिम देता अगर गवाही।
समाचार शासक-गुण गाए, वहीं पे आती तानाशाही।
यारों! कहाँ खड़ा अब देश?
बनाओ नूतन सा परिवेश।।

अगर सोच विपरीत किसी की, क्या दुश्मन बन जाते?
अभी सियासी लोगों में क्यों, अक्सर ही ठन जाते?
पक्ष, विपक्षी ने आपस में, पहले खूब निबाही।
यारों! कहाँ खड़ा अब देश —–

आज सियासी पेशा में जो, पैसा ख़ूब बनाया।
लेकिन हम सबको आपस में, कैसे रोज लड़ाया?
जिस कारण नैतिक मूल्यों की, होती रही तबाही।
यारों! कहाँ खड़ा अब देश —–

जीने खातिर रोजी रोटी, पहला धर्म हमारा।
आपस में मिल्लत से रहना, मौलिक कर्म हमारा।
लोक जागरण सुमन करेगा, होगी नहीं कोताही।
यारों! कहाँ खड़ा अब देश —–

श्यामल सुमन

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