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व्यापारी का दर्द, क्या सच में अन लॉक हुआ है झारखंड

कुणाल सारंगी

जमशेदपुर: अनलॉक की प्रक्रिया पूरे देश मे लागू हो चुकी तकरीबन सभी दुकाने भी खुल चुकी है। पर दुकानों से ग्राहक नदारत है। इस संदरम में बिस्टुपुर के एक दूकानदार ने अपना दर्द साजा किया।

उस दुकानदार से जब झारखंड वाणी के संवाददाता ने जाना चाहा कि लॉकडाउन के बाद दुकानदारी में क्या फर्क पड़ा है तो दुकानदार के मुँह से कुछ शब्द ही नही निकल रहे थे। फिर थोड़ा रुक कर उस दुकानदार ने कहा की अनलॉक तो सिर्फ तसल्ली देने को हुआ है, पर हकीकत में तो आज भी कमाई लॉक है।

एक तो ग्राहक कोरोना के डर से घर से निकलते नही है। निकलते है भी तो प्रशासन से भयभीत रहते है की कही गाड़ी के कागज़ के नाम पे या फिर किसी और बहाने से फाइन न वासिल ले। पूरे दिन दुकान खोल कर खाली बैठे रहते है इस उम्मीद में की कही कोई ग्राहक आजाए। हफ्ते में एक आद दिन ग्राहक आते हैं। तो कुछ बिक जाता है। वैसे रोज ही खाली हाथ घर जाते है, घर वाले भी आस लगाए रहते है, कि आज दुकानदारी कैसी हुई होगी जब दुकान बंद कर घर जाता हूँ। तो घर वालों से आँख मिलाने में भी डर लगता है कही वे कुछ माँग न ले। फिर चुप चाप से जो रूखा सूखा मिलता है उसे खा कर सो जाता हूँ। इस उम्मीद में की कल का दिन अच्छा जाएगा, कल कुछ माल बिक जाएगा, कल ग्राहक आएंगे या कोई और रास्ता निकलेगा।

अनलॉक तो हुआ है साहब लेकिन कमाई पूरी तरह से लॉक है। अब तो दुकान खोलने में भी डर लगता है महाजन आकर गाली-गलौज करते हैं। बैंक वाले भी आकर अपना पैसा मांगते हैं और डराते है। बच्चों के स्कूल से रोजाना फ़ोन कर फीस जमा करने को कहते और धमकाते है कि फीस जमा नही किया तो बच्चों का नाम काट देगे। दुकान मालिक दुकान का भाड़ा के लिये रोज आते है अब तो बिजली बिल भी जमा करने की चिंता है। पता नही आगे क्या होगा। कुछ समझ में नहीं आ रहा है क्या करुं। इतना कहते-कहते उस दुकानदार के आंख में कुछ आंसू आगए रुमाल निकाल कर आँसू पोछने के बाद उसने पूछा की यह कोरोना कब तक खत्म होगा।

इसके बाद उसने कहाँ की सब को व्यपारी चोर ही लगते है पर व्यपारी का दर्द साजा करने कोई नही आता है। ना सरकार को हमारी कोई फिक्र है, ना तो कोई नेता हमारे लिये आवाज उठता है। अतः में उसने इतना ही कहाँ की अनलॉक तो हुआ है साहब पर ज़िन्दगी अभी भी लॉक है।