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उप विकास आयुक्त की अध्यक्षता में जिला स्तरीय निर्यात प्रोत्साहन समिति की बैठक

उप विकास आयुक्त परमेश्वर भगत की अध्यक्षता में आज जिला स्तरीय निर्यात प्रोत्साहन समिति की बैठक सम्पन्न हुई। उपनिदेशक डीजीएफटी आनंद मोहन मिश्रा द्वारा बताया गया कि पूर्वी सिंहभूम जिले में निर्यात की विशाल संभावना है। इस क्षेत्र में स्थापित ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री, ऑटोमोबाइल कंपोनेंट इंडस्ट्री एवं स्टील इंडस्ट्री से पहले से ही उत्पाद का निर्यात किया जा रहा है। इसके अलावा बैठक में उक्त उत्पादों के साथ-साथ अन्य उत्पाद की पहचान करने पर विमर्श किया गया जिसके निर्यात को प्रोत्साहित किया जा सके।

सूर्या लेंका, प्रतिनिधि टाटा स्टील लिमिटेड जमशेदपुर द्वारा जानकारी दी गई कि जमशेदपुर में निर्यात से संबंधित आधारभूत संरचना की काफी कमी है, Inland contain depot के अभाव में कंटेनर मोड में निर्यात करने से आने वाला खर्च बढ़ जाता है। यदि जिले में आईसीडी स्थापित होता है तो कार्गो का एक स्थान पर एकत्र करना आसान होगा। सड़क मार्ग पर निर्यात निर्भरता कम होगी जिससे निर्यात करना सस्ता एवं सुविधाजनक होगा। इसके अलावा वेयर हाउस का जिले में अभाव होने के कारण हल्दिया एवं कोलकाता पोर्ट पर निर्यातकों की निर्भरता बढ़ जाती है। बैठक में एक कस्टम इंटरफेस का जिले में अत्यंत आवश्यकता होने की बात सामने आई। उप निदेशक ने कहा कि इस बात पर भी विचार किया जाना चाहिए कि आईसीडी प्रारंभ करने की योजना क्यों विफल हुई, उनका सुझाव था कि यदि अधिक से अधिक इकाइयां आईसीडी के माध्यम से एक्सपोर्ट का कार्य करती है तो इससे परिचालन व्यय में कमी आएगी।टाटा कमिंस के प्रतिनिधि ने बताया कि कंपनी द्वारा ऑटो इंजन का निर्यात किया जाता है, परंतु चेन्नई और मुंबई की तुलना में कोलकाता का टर्न अराउंड टाइम अधिक होने के कारण निर्यात में कठिनाई आती है। कच्चे माल एवं मजदूरी के क्षेत्र में भारत चीन से आगे है, परन्तु tarrif cost की समस्या है साथ ही आधारभूत संरचना का अभाव है ।

टाटा ब्लूस्कोप के प्रतिनिधि पीयूष कुमार द्वारा जानकारी दी गई कि इकाई द्वारा प्रतिवर्ष 8000 से 9000 कलर कोटेड स्टील का निर्यात किया जाता है। परंतु SAPTA(South Asean Free Trade Area) प्रमाण पत्र प्राप्त करने में कठिनाई होती है। इस पर उपनिदेशक डीजीएफटी द्वारा बताया गया कि यह एक पूर्णता ऑनलाइन प्रक्रिया है जिसमें आवेदक को कहीं भी जाने की आवश्यकता नहीं है। साथ ही आईसीडी, रेल मार्ग से निर्यात एवं अन्य किसी प्रकार की कठिनाई के संबंध में डीजीएफटी सरकार एवं संबंधित विभाग से समन्वय स्थापित कर निर्यातकों की समस्याओं के त्वरित निष्पादन हेतु हरसंभव सहायता प्रदान करेगा।

खेतान इंटरप्राइजेज के प्रतिनिधि द्वारा बताया गया कि डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति कमजोर होने के कारण निर्यात में कठिनाई आ रही है। साथ ही बांग्लादेश सीमा पर वाहनों के अनावश्यक रोके जाने से निर्यात वस्तुओं के खराब होने की संभावना होती है। इस पर उपनिदेशक डीजीएफटी द्वारा सभी इकाइयों से अनुरोध किया है कि वे सभी अपनी-अपनी इकाइयों द्वारा किए जाने वाले निर्यात में आने वाले हर प्रकार की कठिनाइयों के बारे में महाप्रबंधक-जिला उद्योग केंद्र चाईबासा को एवं उन्हें ईमेल के माध्यम से विस्तृत जानकारी प्रदान करें। महाप्रबंधक द्वारा भी अपनी इमेल को सभी इकाइयों से साझा करने के पश्चात अनुरोध किया कि सभी इकाइयां अपनी समस्याओं को जल्द से जल्द बताएं ताकि उनकी समस्या एवं सुझाव को संकलित कर उद्योग विभाग को यथाशीघ्र अवगत कराया जा सके। टाटा स्टील लिमिटेड के प्रतिनिधि द्वारा जानकारी दी गई कि बांग्लादेश में निर्यात करने हेतु सड़क मार्ग, भारत-बांग्लादेश नदी मार्ग एवं अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग का माध्यम उपलब्ध है, वर्तमान में टाटा स्टील द्वारा भारत-बांग्लादेश नदी मार्ग का उपयोग किया जा रहा है एवं यदि किसी इकाई को निर्यात से संबंधित सहायता की आवश्यकता है तो टाटा स्टील इनकी सहायता कर सकता है।

उप विकास आयुक्त द्वारा आश्वासन दिया गया कि जिला प्रशासन द्वारा निर्यात करने वाली सभी इकाइयों को हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी जिससे जिले में निर्यात को एक नई दिशा मिलेगी। उन्होंने आज की बैठक के आधार पर आगामी बैठकों में निर्यात के प्रोत्साहन हेतु सुदृढ़ कार्यवाही की आशा व्यक्त किये।

बैठक में उप निदेशक डीजिएफटी, निदेशक एमएसएमई के प्रतिनिधि, संयुक्त आयुक्त वाणिज्यकर विभाग, उप सहायक आयुक्त उत्पाद, महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र चाईबासा, जिला कृषि/उद्यान पदाधिकारी पूर्वी सिंहभूम, जिला मत्स्य पदाधिकारी पूर्वी सिंहभूम, जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक पूर्वी सिंहभूम, प्रबंधक NABARD, एवं सचिव एससीसीआई के साथ निर्यात करने वाली इकाइयों जैसे टाटा स्टील लिमिटेड, टाटा मोटर्स लिमिटेड, टाटा कमिंस लिमिटेड, टाटा ब्लूस्कोप लिमिटेड, खेतान इन्टरप्राइजेज, टाटा टिनप्लेट लिमिटेड, टिमकेन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड के प्रतिनिधि आदि ने भाग लिया।