झारखण्ड वाणी

सच सोच और समाधान

उद्योग विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की विवरणी तथा किस तरह योजनाओं का लाभ लिया जा सकता है, क्या योग्यता है इसकी संपूर्ण विवरणी निम्नवत है

उद्योग विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की विवरणी तथा किस तरह योजनाओं का लाभ लिया जा सकता है, क्या योग्यता है इसकी संपूर्ण विवरणी निम्नवत है

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम- इस योजना के अंतर्गत विनिर्माण एवं सेवा क्षेत्र की इकाइयों को सरकार द्वारा क्रमशः 25 लाख एवं 10 लाख रूपये तक का ऋण प्रदान किया जाता है। इसके अतिरिक्त सामान्य श्रेणी के व्यक्तियों को शहरी क्षेत्र में कार्य करने हेतु 15% एवं ग्रामीण क्षेत्र में कार्य हेतु 25% एवं महिलाओं, अल्पसंख्य, ओबीसी, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों को शहरी क्षेत्र में 25% एवं ग्रामीण क्षेत्र में 35% अनुदान प्रदान की जाती है। यह एक पूर्णत: ऑनलाइन प्रक्रिया है जिसमें आवेदक kviconline.gov.in पोर्टल पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।

झारखंड औद्योगिक एवं निवेश प्रोत्साहन नीति 2016- इस नीति के अंतर्गत MSME इकाइयों को सरकार द्वारा प्लांट एवं मशीनरी पर किए गए निवेश का 20% अनुदान दिया जाता है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिलाओं एवं दिव्यांगों को अतिरिक्त 5% अनुदान का लाभ प्रदान किया जाता है। इसके अतिरिक्त इकाइयों को निम्न सुविधाएं प्रदान की जाती है-

1. स्टांप ड्यूटी एवं निबंधन शुल्क- रैयत द्वारा सीधे खरीदी गई भूमि पर उद्योग स्थापित करने हेतु इकाइयों को स्टांप ड्यूटी एवं निबंधन शुल्क पर सरकार द्वारा 100% छूट प्रदान की जाती है, यह छूट केवल पहले लेन-देन पर लागू होती है।
2. गुणवत्ता प्रमाण पत्र – B.I.S अथवा अन्य ख्याति प्राप्त अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से गुणवत्ता प्रमाण पत्र प्राप्त करने हेतु इकाइयों को किए गए कुल व्यय का 50% (अधिकतम सीमा ₹10 लाख रुपए) सरकार द्वारा प्रदान किया जाता है।

3. पेटेंट निबंधन- राज्य सरकार द्वारा इकाइयों को किए गए मूल अनुसंधान/कार्य के पेटेन्ट को निबंधित एवं प्राप्त करने हेतु कुल व्यय का 50% (अधिकतम सीमा ₹10 लाख रुपए) प्रदान किया जाता है।

4. ब्याज अनुदान- राज्य सरकार द्वारा नई MSME इकाइयों को बैंक द्वारा प्रदत ऋण पर 5% वार्षिक छूट 5 साल तक दी जाती है। इस छूट की अधिकतम सीमा सूक्ष्म इकाइयों के लिए 10 लाख, लघु इकाइयों के लिए 20 लाख एवं मध्यम इकाइयों के लिए 40 लाख रुपए है।
इसके अतिरिक्त औद्योगिक नीति के अंतर्गत VAT Subsidy क्लस्टर विकास हेतु अनुदान जैसी सुविधाएं इस नीति में समाहित हैं।

*झारखंड खाद्य नीति 2015- यह नीति माह सितंबर 2020 में बंद हो गई है, नई संशोधित नीति के शीघ्र लागू होने की संभावना है।

*सिंगल विंडो सिस्टम- औद्योगिक विकास के प्रोत्साहन के उद्देश्य से विभिन्न अनुज्ञप्तियों, अनुमतियों एवं स्वीकृतियों को त्वरित एवं समयबद्ध मंजूरी प्रदान करने, नए निवेश को सुगम एवं सरल करने हेतु झारखंड सिंगल विंडो क्लीयरेंस अधिनियम 2015 को राज्य सरकार द्वारा लागू किया गया है। जिला स्तर पर महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र सिंगल विंडो सिस्टम के नोडल पदाधिकारी होते हैं। जिला स्तर पर उपायुक्त की अध्यक्षता में गठित जिला कार्यकारिणी समिति में महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र सदस्य सचिव, जिला वाणिज्य कर उपायुक्त सदस्य, क्षेत्रीय पदाधिकारी प्रदूषण नियंत्रण पार्षद सदस्य, जिला योजना पदाधिकारी सदस्य, श्रम विभाग के जिला पदाधिकारी सदस्य, जिला के बिजली वितरण निगम के कार्यपालक अभियंता सदस्य, जिला खनन पदाधिकारी सदस्य एवं प्रमंडल वन अधिकारी सदस्य होते हैं। जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक जिला स्तरीय नोडल एजेंसी के नोडल पदाधिकारी होते हैं। यह एजेंसी जिले में निवेश को प्रोत्साहित करने, उद्यमियों को निवेश एवं उनकी परियोजनाओं को स्थापित करने में सहायता एवं मार्गदर्शन प्रदान करने, उद्यमियों को आवेदन प्रपत्र उपलब्ध कराने एवं विभिन्न विभागों एवं प्राधिकारों से आवश्यक मंजूरी को नियत समय पर दिलवाने में एवं जिला कार्यकारिणी समिति और राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचना के माध्यम से प्रत्यायोजित शक्ति/ कार्यों का प्रयोग करेगी।

*स्टैंड अप इंडिया- इस योजना के अंतर्गत महिलाओं, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों को ₹10 लाख से लेकर ₹1 करोड़ रूपये का ऋण प्रदान किया जाता है। यह ऋण विनिर्माण, सेवा क्षेत्र एवं ट्रेडिंग कार्य हेतु प्रदान किया जाता है। इसका भुगतान 7 वर्षों में किया जा सकता है। इस योजना में ऋण प्राप्तकर्ता द्वारा कुल परियोजना व्यय का 10% स्व-निवेश करना पड़ता है। ब्याज की दर बैंक द्वारा उस श्रेणि में निर्धारित न्यूनतम होगी जो बेस रेट(MCIR)+ 3% + Tenor Premium) से अधिक नहीं होगी।

*वन आधारित उद्योग-* झारखंड में विशेषतः पूर्वी सिंहभूम जिले में वन संपदा विशाल एवं विविधता पूर्ण है, जो विभिन्न प्रकार के उद्योगों को स्थापित एवं संचालित करने में पूर्णता सक्षम है। इनमें से कुछ प्रमुख उद्योग निम्नवत हैं-
कागज उद्योग, रबड़ उद्योग, बेंत उद्योग, लाख उद्योग, रेजीन उद्योग आदि।

उद्यमी PMEGP लोन के माध्यम से इनमें से किसी उद्योग को स्थापित कर स्वरोजगार प्राप्त कर सकते हैं । मुख्यमंत्री लघु कुटीर बोर्ड द्वारा भी महाप्रबंधक- जिला उद्योग केंद्र के मार्गदर्शन में इन उद्योगों को स्थापित करने एवं संचालित करने में सहायता प्राप्त की जा सकती है।

*पॉलीमर एवं रसायन आधारित उद्योग-* इस श्रेणी में आने वाले कुछ प्रमुख उद्योग निम्नवत है-
अलोवेरा जेल निर्माण, बॉल पेन इंक, बैटिंग ग्लव्स, बेल्टिंग लेदर, बिंदी निर्माण, ब्लो-मोल्डेड प्लास्टिक कंटेनर, बबल पैकिंग पेपर, कैनवास जूते, लकड़ी पर रासायनिक छपाई, बच्चों के जूते, क्लीनिंग पाउडर, फ्रेस क्रीम, फ्लोर पॉलिश आदि ।

उद्यमी PMEGP लोन के माध्यम से इन उद्योगों को स्थापित एवं संचालित कर सकते हैं।

*खनिज आधारित उद्योग- इस श्रेणी में आनेवाले कुछ उद्योग निम्नवत है-

1. सिमेन्ट जाली
2. सिरैमिक कैण्डल (बाटर फिल्टर में उपयोग हेतु)
3. चॉक क्रेयॉन्स
4. कांच के सजावट के वस्तु
5. निकेल प्लेटिंग
6. फ्लाई ऐश ब्रिक्स
7. पत्थर की कटाई एवं पॉलिशिंग
8. लाह चूड़ी निर्माण
9. लीड पेंसिल
10. मिनरल ग्राइंडिग
11. प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्ति एवं खिलौना निर्माण, आदि।
PMEGP लोन के माध्यम से इन उद्योगों को स्थापित एवं संचालित करने में सरकार से सहायता प्राप्त की जा सकती है।

*टेक्सटाइल उद्योग- झारखण्ड में टेक्सटाइल उद्योग के प्रोत्साहन हेतु झारखण्ड टेक्सटाइल, अपैरेल एवं फूवेयर पॉलिसी 2016 अन्तर्गत राज्य सरकार द्वारा फैपिटल इन्वेस्टमेंट सब्सिडी के माध्यम से इस क्षेत्र में निवेश करने वाली इकाइयों को प्लांट एवं मशीनरी के कुल निवेश का 20% अनुदान (अधिकतम सीमा 50 करोड़ रूपये) प्रदान करती है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिलाओं एवं दिव्यांगो को CIS के अंतर्गत 5% अतिरिक्त अनुदान का लाभ प्राप्त है। अनुदान की राशि एकमुश्त प्रदान की जाती है इसके अलावा बैंक से लिये गये लोन पर 7% वार्षिक या बैंक लोन के ब्याज का प्रतिवर्ष ब्याज की राशि का 50% छूट (इनमे से जो कम हो) सात वर्षों तक सरकार द्वारा दी जाती है । इसी प्रकार झारखण्ड औधोगिक एवं निवेश प्रोतसाहन नीति में समाहित स्टाम्प डयूटी एवं निबंध शुल्क में छूट एवं 7 वर्षो तक 50 प्रतिशत बिजली बिल में छूट की सुविधा टेक्सटाइल उद्योग को प्रदान की जाती हैं।

*सेवा क्षेत्र-इस क्षेत्र में आनेवाले कुछ प्रमुख उद्योग निम्नवत हैं-
इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की रिपेयरिंग एवं मेन्टेनेंस, टेन्ट हाउस, दो पहिया गाड़ी की रिपेयरिंग एवं सविर्सिंग, वेब डिजाइनिंग, ऑटो गैरेज, सैलून एव ब्यूटी पार्लर, कम्प्यूटर मेंटेनेन्स एवं सर्विसिंग, साइबर कैफे, ढ़ाबा, ऑडियो सिस्टम को भाड़े पर देना, प्लंबिग, बूटीक कार्य

PMEGP लोन के माध्यम से इन उद्योगों की स्थापना एवं संचालन किया जा सकता है।