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सरकार ने बेरोजगारों को दिया रोजगार, संपत्ती बेच दुकानदार मालामाल

सरायकेला के आदित्यपुर में झारखंड सरकार ने बेरोजगारों को रोजगार देने के लिए दुकान बनवाकर दिया था, लेकिन कई दुकानदारों ने दूसरे के पास या तो बेच दिया या तो किराए पर लगा दिया, जिससे नगर निगम को भारी नुकसान हो रहा है. इस मामले में अब नगर निगम ने कार्रवाई करने का मन बना लिया है. कोरोना काल के बाद दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

सरायकेला: जिले के आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र में लगभग 15 साल पहले बेरोजगार स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तत्कालीन राज्य सरकार की स्वपोषित योजना के तहत सस्ते किराए पर दुकानों का निर्माण कर दिया गया था, ताकि लोगों की आजीविका चल सके, लेकिन वर्षों बाद आज सस्ते दर पर निगम की ओर से उपलब्ध कराये गये किराये के दुकानों को लोगों ने लाखों रुपए में या तो बेच दिया या फिर उन दुकानों में हजारों रुपए देकर किराया लगा दिया. ऐसे में निगम को बड़े राजस्व का नुकसान हो रहा है. अब निगम ने योजना का दुरुपयोग करने वाले दुकानदारों के खिलाफ शिकंजा कसना भी शुरू कर दिया है.
वर्ष 2005 में निगम क्षेत्र अंतर्गत इमली चौक के पास सरकारी जमीन पर तत्कालीन आदित्यपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति की ओर से छोटे-छोटे कुल 100 दुकानों का निर्माण कराया गया, स्वपोषित योजना का मुख्य उद्देश्य था, लोगों को रोजगार उपलब्ध कराना, जिसके तहत वे निगम की ओर से आवंटित इन दुकानों को संचालित कर आजीविका चलाए. उस समय अधिसूचित क्षेत्र समिति मात्र 384 रुपया प्रति महीने की दर से इन दुकानदारों से किराया वसूलता था, जो आज पन्द्रह वर्ष बीत जाने के बाद भी उसी दर पर दुकानदारों से निगम भाड़ा वसूल रही है, लेकिन आज वर्षों बीत जाने के बाद मूल आवंटी ने किराए पर मिले इन दुकानों को लाखों मूल्य में दूसरे दुकानदारों को बेच दिया या फिर अधिकतर ने किराए के दुकान पर ही दोबारा किराया लगा दिया और मोटी रकम की वसूली करने लगे. बताया जाता है कि 384 रुपया किराया देने वाले दुकानदार अपनी दुकानों से आज 60 हजार प्रति महीने भाड़ा वसूल रहे हैं. अब नगर निगम ने इन दुकानों के किराए को बढ़ाने का फैसला लिया है और निगम अब दुकान के मूल आवंटी को खोज रही है, ताकि पता चल सके कि जिन लोगों को वर्षों पहले किराए पर दुकान दिया गया था, वह सच में स्वयं कारोबार कर रहे हैं या दुकान को बेच चुके हैं. इधर निगम के कार्रवाई प्रक्रिया शुरू करने से अब मौजूदा दुकानदारों में हड़कंप मच गया है.
वर्षों बाद नगर निगम ने अपने इन दुकानों की वस्तु स्थिति जानना चाहा तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आया. नगर निगम ने पहले इन 100 दुकानों की सर्वे कराई, जिसमें पता चला कि अधिकतर लोगों ने जिन्हें निगम ने सस्ते दर पर किराए के तौर पर दुकान आवंटित किए गए थे, उनमें से 90 फीसदी से भी अधिक लोगों ने लाखों कीमत में दुकान बेच दी है, या फिर अधिकतर लोगों ने दुकानों को दोबारा किराए पर दिया है. वहीं कई वर्षों से इन दुकानदारों ने 384 रुपए प्रतिमाह किराया भी नहीं चुकाया. अब दुकानदारों ने किराए देने का मन बनाया है, लेकिन निगम अब मूल आवंटी को खोजा जा रहा है. ऐसे में वर्तमान में इन दुकानों में व्यवसाय कर रहे लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है.
आदित्यपुर नगर निगम के मेयर विनोद श्रीवास्तव ने निगम के दुकानों को ऊंचे कीमतों पर बेचे जाने के मामले की जांच कराए जाने के मुद्दे पर बताया कि नगर निगम के आठवीं बोर्ड की बैठक में सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव लाया गया, कि इन दुकानों से अब 384 के बजाय 1000 प्रतिमाह किराया वसूला जाएगा, जिसकी तैयारी नगर निगम ने शुरू कर दी है. दुकानदार भी बढ़े हुए किराए का विरोध कर रहे हैं. दुकानदार बताते हैं कि 15 सालों में एक बार भी नगर निगम ने दुकानों के आसपास सफाई नहीं करवाई, इन दुकानों के सामने सड़क भी नहीं बनाए गए, ऐसे में दुकानदारों ने खुद दुकानों की मरम्मत कराई और आसपास मूलभूत
सुविधाओं का भी स्वयं व्यवस्था भी किया.
नगर निगम ने इन दुकानदारों को चिन्हित कर कोरोना का असर थमते ही कार्रवाई करने का मन बना लिया गया है. निगम कार्यालय सूची तैयार कर रही है कि किन-किन दुकानदारों ने अपने दुकानों को या तो लाखों की कीमत पर बेचा है या फिर उन्हें दोबारा किराए पर दिया है. निगम आरोपी दुकानदारों का आवंटन भी रद्द करेगी.
वर्ष 2005 में स्वपोषित योजना के तहत बनाए गए इन 100 दुकानों को बेरोजगार लोगों को आवंटित करते हुए इकरारनामा भी नगर निगम ने तैयार किया था. इस इकरारनामा के तहत तीन प्रमुख बिंदुओं पर दुकानदारों की सहमति ली गई थी, जिनमें मुख्य रुप से…
1. निगम के ओर से बना कर दिए गए दुकानों के मूल स्वरूप के साथ कोई छेड़छाड़ या विचलन नहीं करना है.
2. दुकानों के मूल आवंटी को प्रतिमाह निगम को निर्धारित किराया देना होगा, जबकि दुकानदार किसी भी हाल में इन दुकानों को अन्य किसी को किराए पर नहीं दे सकते.
3. निगम के तरफ से तय नियमों की अनदेखी करने पर निगम भाड़े के रूप में आवंटित किए गए दुकानों को रद्द कर सकता है.
अब नगर निगम एक बार फिर इन दुकानों को सुव्यवस्थित करते हुए दुकानों को दो मंजिला बनाने का निर्णय लिया है, ताकि अधिक से अधिक लोगों को रोजगार दिया जा सके. इसके अलावा इमली चौक मार्केट को विकसित किए जाने की भी योजना नगर निगम ने बनाई है, हालांकि अब तक इन योजनाओं पर काम शुरू नहीं हो सका है, लेकिन नगर निगम ने दावा किया है कि जल्द ही कार्रवाई के बाद विकसित योजनाओं को पूरा किया जाएगा.