झारखण्ड वाणी

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सरायकेला बार एसोसिएशन मेकोरोना का प्रकोप ,अधिवक्ताओं में कोरोना संक्रमण को लेकर भय व्याप्त ।

कुणाल सारंगी

जमशेदपुर:झारखण्ड वाणी संवाददाता:कोरोना के बढते संक्रमण के मद्देनजर अधिवक्ताओं ने न्यायालय के कार्य को कुछ दिनों के लिए करने की मांग की है।सोमवार को प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश की अगुवाई में विजिलेंस कमिटी की बैठक में बार एसोसिएशन के महासचिव अधिवक्ता अनिल तिवारी ने इसकी मांग की है ।इनकी मांग पर फिलहाल कोई निर्णय नहीं लिया गया है प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश ने लिखित आवेदन मिलने पर हाईकोर्ट से परामर्श लेने के बाद ही निर्णय लेने का आश्वासन दिया है ।जिला बार एसोसिएशन के महासचिव अनिल तिवारी ने बताया कि बैठक में अभी मौखिक रूप से कोरोना के बढते संक्रमण के.मद्देनजर न्यायालय के कार्य को कुछ दिन तक स्थगित करने की मांग की गयीं है । इस मुद्दे को लेकर जिला बार एसोसिएशन की ओर से मांग पत्र दिया जायेगा ।दुसरी ओर अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पु ने एक बार पुनः मांग की है कि जमशेदपुर जिला कोर्ट को फैलते कोरोनावायरस से बचाव के लिए बंद किया जाना चाहिए अन्यथा इससे स्थिति और भयावह हो सकती है सरायकेला खरसावां जिला के बार एसोसिएशन अध्यक्ष के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद से एक बार फिर अधिवक्ता पप्पू ने अपनी मांग को दोहराया है कोरोना संकट को देखते हुए कोर्ट को कुछ दिनों के लिए बंद किया जाना चाहिए सरायकेला खरसावां जिला बार एसोसिएशन अध्यक्ष के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने से सरायकेला कोर्ट में सनसनी फैल गई इस खबर के बाद सरायकेला जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रधान ने आदेश जारी कर सरायकेला कोर्ट 20 जुलाई से 5 अगस्त तक के लिए बंद कर दिया है इसका एक नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया है उल्लेखनीय है कि कोर्ट परिसर में कई तरह के लोग आते हैं मुकदमे से जुड़े वकील पुलिस के अलावा भी कोर्ट लोग पहुंचते हैं ऐसे में कोरोनावायरस का खतरा बढ़ जाता है स्थिति ऐसी हो गई है कि पुलिस इस बात का पता लगा रही है कि सरायकेला और खरसावां जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष के संपर्क में कौन-कौन लोग आए थे पता लगाकर पुलिस उन्हें क्वारंटाइन करने की कोशिश कर रही है और उनका सैंपल जांच के लिए भेजा जाएगा वही जमशेदपुर जिला कोर्ट की भी स्थिति संतोषजनक नहीं कही जा सकती है यहां भी कई तरह के लोग वकील पुलिस और मुकदमे से जुड़े लोग आते हैं अगर समय पूर्व कोई निर्णय नहीं लिया जाता है तो खतरे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है