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श्रीराम मंदिर भूमि पूजन: विशेष सिक्योरिटी से लैस होगा आमंत्रण पत्र

कुणाल सारंगी

अयोध्या में पांच अगस्त को राम मंदिर का शिलान्यास प्रस्तावित है. राम मंदिर भूमि पूजन में 36 परंपराओं के 135 पूज्य संत महात्माओं एवं अन्य विशिष्ट अतिथि गणों को आमंत्रित किया गया है.

अयोध्या: राम मंदिर भूमि पूजन में 36 परंपराओं के 135 पूज्य संत महात्माओं के साथ कुल 175 विशिष्ट अतिथि गणों को आमंत्रित किया गया है. ट्रस्ट ने कहा है कि श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के 77 में आंदोलन में भाग लेने वाले सभी राम भक्त बड़ी संख्या में उपस्थित होने थे. वहीं वर्तमान समय में कोरोना महामारी के चलते यह संभव नहीं हो पा रहा है. अयोध्या के कारसेवक पुरम में संवाददाता सम्मेलन के दौरान चंपत राय ने यह बात कही.
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से भूमि पूजन कार्यक्रम में अतिथियों को आमंत्रण पत्र भेजा जा रहा है. सबसे पहले अयोध्या के अतिथियों को आमंत्रित किया गया है. आमंत्रण कार्ड के जरिए श्रीराम जन्मभूमि परिसर में अतिथियों को प्रवेश दिया जा रहा है. वह विशेष सिक्योरिटी से लैस है. इस कार्ड पर यूनिक कोड है. इस कार्ड के जरिए राम जन्मभूमि परिसर में वन टाइम इंट्री होगी. एक बार प्रवेश करने के बाद राम जन्मभूमि परिसर से निकलने के बाद दोबारा इंट्री के लिए यह कार्ड मान्य नहीं होगा.
राम मंदिर भूमि पूजन में एक आमंत्रण कार्ड से एक ही व्यक्ति का प्रवेश होगा. कार्ड के साथ अधिकृत परिचय पत्र लाना अनिवार्य होगा. कार्यक्रम में किसी भी प्रकार का मोबाइल वापस लाना पूर्णतया वर्जित है.
श्रीराम जन्मभूमि परिसर में राम मंदिर भूमि पूजन के लिए आमंत्रित अतिथियों को दो घंटे पहले प्रवेश करना होगा. राम मंदिर ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय ने कहा है कि परिसर के मुख्य द्वार पर उन्हें अपने पहचान पत्र और आमंत्रण पत्र के साथ समय से पहुंचना होगा, तभी परिसर के अंदर प्रवेश मिल पाएगा. उन्होंने आमंत्रित अतिथियों से पांच अगस्त को सुबह दस बजे तक राम जन्मभूमि परिसर में प्रवेश करने की अपील की है.
राम मंदिर भूमि पूजन में सभी प्रमुख परंपराओं के संतो को आमंत्रित किया गया है. इसमें दशनामी परम्परा, रामानंद वैष्णव परंपरा, रामानुज परंपरा, नाथ परंपरा, निंबार्क, माधवाचार्य, वल्लभाचार्य, रामसनेही, कृष्ण प्रणामी, उदासीन, निर्मली संत, कबीर पंथी, चिन्मय मिशन, रामकृष्ण मिशन, लिंगायत, बाल्मीकि संत, रविदास जी, संत आचार्य समाज, सिख परंपरा, बौद्ध, जैन, संत कैवल्य ज्ञान, संत पंथ इस्कान, स्वामीनारायण, वारकरी, एकनाथ बंजारा संत, वनवासी संत, आदिवासी गौण, गुरु परंपरा, भारत सेवाश्रम संघ, आचार्य समाज, संत समिति, सिंधी संत अखाड़ा परिषद के पदाधिकारी और नेपाल से भी पूज्य संत कार्यक्रम में आमंत्रित किए गए हैं.
राम मंदिर भूमि पूजन का अनुष्ठान पीएम मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत की उपस्थिति में वैदिक रीति रिवाज से संपन्न किया जाएगा.
परिसर में पूजा पाठ का कार्य 108 दिन पहले से जारी है. पूजा पाठ का कार्यक्रम बीते 18 अप्रैल 2020 से आरंभ हो गया था. इस दौरान प्रतिदिन विष्णु सहस्त्रनाम, श्री राम सहस्त्रनाम, श्री हनुमत सहस्त्रनाम, दुर्गा सप्तशती पाठ के मंत्रों द्वारा हवन एवं रुद्राभिषेक किया जा रहा था. ट्रस्ट का मानना है कि इस अनुष्ठानों से संपूर्ण क्षेत्र प्रचंआध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत है.
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय ने कहा कि कुछ लोगों ने रामलला के हरे रंग के वस्त्र पर विवाद खड़ा करने का प्रयास किया है. इसका संबंध प्रधानमंत्री कार्यालय या श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट नहीं है. यह विषय पूर्णता मुख्य पुजारी और परंपरा से है. इसका निर्णय रामलला के मुख्य पुजारी परंपराओं के अनुरूप करते हैं. चंपत राय ने कहा कि बुध ग्रह का संबंध हरिजन से है और इस परंपरा का पालन जब से रामलला विराजमान हैं तब से किया जा रहा है. इस पर टिप्पणी करना बेकार है.
राम मंदिर निर्माण को लेकर देश में उत्साह है. बड़ी संख्या में लोगों ने अपने आस-पास के पवित्र स्थल के जल और मिट्टी को राम मंदिर की नींव में डालने के लिए भेजा है. बड़ी संख्या में पवित्र मिट्टी कोरियर द्वारा तीर्थ क्षेत्र कार्यालय या कारसेवक पुरम में भेजा जा रहा है. इसमें प्रमुख रूप से गंगा, यमुना, नर्मदा, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी सिंधु, ब्रह्मपुत्र, झेलम, रावी, चुनाव सहित समस्त पवित्र नदियों एवं देश के सभी प्रसिद्ध पवित्र कुंडों का जल शामिल है. इसके साथ ही अनेक ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व के स्थानों की मिट्टी भी अयोध्या आई है. प्रमुख रुप से हल्दीघाटी की मिट्टी, चित्तौड़गढ़ दुर्ग की मिट्टी, स्वर्ण मंदिर के कुंड का जल और मिट्टी, वैष्णो देवी की मिट्टी, मैसेकर घाट की मिट्टी, बिठूर में ब्रह्मखूंटी और नाना साहब पेशवा के किले की मिट्टी, रायगढ़ किले की मिट्टी, सभी ज्योतिर्लिंगों के प्रांगण की मिट्टी, सरस्वती उद्गम स्थल का जल और रज, रविदास मंदिर काशी की रज, बाबा साहब अंबेडकर की इच्छा भूमि एवं राष्ट्रीय संघ सेवक संघ के उद्गम स्थल नागपुर का रज और पवित्र जल, मानसरोवर का पवित्र जल और रज अयोध्या पहुंच चुका हैं. इन सभी को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के लिए कैंप कार्यालय में सुरक्षित रखा गया है.
बाबरी मस्जिद के पक्षकार इकबाल अंसारी को भी ट्रस्ट ने श्रीराम मंदिर भूमि पूजन के लिए आमंत्रित किया है. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय ने इस बात की पुष्टि की है. वहीं सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले अयोध्या निवासी चाचा के नाम से प्रसिद्ध मोहम्मद शरीफ को भी ट्रस्ट ने आमंत्रित किया है. आपको बता दें कि शरीफ चाचा ने अयोध्या और आसपास के जिलों में अब तक धार्मिक मान्यता के अनुरूप 5500 शवों का अंतिम संस्कार करा चुके हैं. इसके लिए उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा गया है
अयोध्या विकास प्राधिकरण से राम मंदिर के संशोधित नक्शे के मुताबिक मंदिर निर्माण के लिए अभी अनुमति लेना बाकी है. विकास प्राधिकरण से अनुमति प्रमाण मिलने के बाद राम जन्मभूमि परिसर में मंदिर की नींव की खुदाई की जानी है. ऐसे में ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष देव गिरी महागाज ने बताया कि राम मंदिर निर्माण के प्रारंभ में नींव में जिन शिलाओं को स्थापित करना है उनकी पूर्व रूप में पूजा की जानी है. इसके बाद एडीए से अनुमति मिलने के बाद जब नींव की खुदाई होगी तो उसे स्थापित किया जाएगा.