झारखण्ड वाणी

सच सोच और समाधान

प्रोफेसर अब्दुल बारी मानवीय संवेदना के प्रतीक- प्रोफेसर राजीव वर्मा

जमशेदपुर । गोलमुरी स्थित अब्दुल बारी मेमोरियल महाविद्यालय में आयोजित प्रोफेसर अब्दुल बारी व्याख्यानमाला के तहत् *कोरोना काल में मानवीय संवेदना* विषय पर ऑनलाइन संगोष्ठी में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर राजीव कुमार वर्मा ने कहा कि प्रोफ़ेसर अब्दुल बारी मानवीय संवेदना के प्रतीक हैं । उन्होंने गांधी और अब्दुल बारी के विचारों से अवगत कराते हुए कहा कि जो भी महान व्यक्ति होते हैं, वे संवेदनशील भी होते हैं । उन्होंने मानवीय संवेदनाओं को अरस्तु से लेकर मार्क्स तक और भारतीय दर्शन में प्राचीन से लेकर बौद्ध दर्शन तक बनती हुई कड़ी को जोड़ते हुए कहा कि कोरोना महामारी में शारीरिक रूप से संवेदनशील न सही, परंतु मानवीय रूप से लोगों के दुख-दर्द को साझा करना चाहिए। जिस तरह से कोरोना से ग्रसित लोगों के प्रति जन सामान्य द्वारा अछूत जैसा व्यवहार किया जाने लगा है, वह किसी न किसी रूप में मानवीय मूल्यों का उल्लंघन है। हम दूर से भी उनके प्रति सहृदयता रखकर रोग से लड़ने की क्षमता को बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं।

व्याख्यानमाला के उदघाटन वक्तव्य में कॉलेज की प्राचार्य और कोल्हान विश्वविद्यालय के मानविकी संकाय की डीन डॉ. मुदिता चंद्रा ने कहा कि प्रोफेसर अब्दुल बारी के नाम पर यह पहला व्याख्यानमाला है। अब इसके तहत निरंतर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे । उन्होंने अपने संदेश में कहा कि कोरोनाकाल में दूसरों का ख्याल रखने के क्रम में सकारात्मक रुप से अपना ख्याल भी रखना चाहिए। साथ ही उन्होंने इस व्याख्यानमाला के संयोजक डॉ रवीन्द्र कुमार चौधरी के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि वे जिस काम को अपने हाथ लेते हैं, उसका सफल होना सुनिश्चित है।

कार्यक्रम के संचालन क्रम में इस व्याख्यानमाला के आयोजन सचिव और मैथिली विभागाध्यक्ष डॉ. रवीन्द्र कुमार चौधरी ने प्रोफेसर अब्दुल बारी की जीवनी एवं महाविद्यालय स्थापना काल से अब तक की स्थिति को विस्तृत रूप से प्रस्तुत करते हुए इसके उपादेयता को बताया। अंत में राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डा. राजेन्द्र भारती ने धन्यवाद ज्ञापन किया। ऑनलाइन व्याखानमाला में भूगोल विभाग के भवेश कुमार, ज्योति उपाध्याय, राधेश्याम तिवारी, आर पी चौधरी, आर सी ठाकुर ने तकनीकी योगदान दिया।