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पिपराडीह रेलवे रैक पॉइंट पर पचास पैसे को लेकर राजनीति शुरू, दो गुटों में बंटे मजदूर

कोडरमा के पिपराडीह रेलवे रैक पॉइंट पर मजदूरों की मजदूरी को लेकर राजनीति शुरू हो गई हैं, जिसके कारण यहां काम करने वाले मजदूर भी दो गुटों में बट गए हैं. वहीं, मजदूरों के 50 पैसे प्रति बोरी ढुलाई को लेकर लड़ाई तेज हो गई है.

कोडरमा: पचास पैसे की लड़ाई में इन दिनों जिले का पिपराडीह रेलवे रैक पॉइंट राजनीतिक का अखाड़ा बन गया है. पचास पैसे की लड़ाई में पिपराडीह रेलवे रैक पॉइंट पर काम करने वाले दो सौ से ज्यादा मजदूर दो गुटों में बट गए हैं और राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई में लगातार विवाद बढ़ता ही जा रहा है.
कोडरमा रेलवे स्टेशन से पिपराडीह में रेलवे का रैक पॉइंट शिप्ट किए जाने के बाद से लगातार विवाद बढ़ता जा रहा है. पिपराडीह रैक पॉइंट पर काम कम और राजनीतिक ज्यादा हो रही है. सुनने में भले ही थोड़ा अजीब लगे, लेकिन सच यह है कि पचास पैसे की लड़ाई में पिपराडीह रेलवे रैक पॉइंट पर राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है.
मजदूर समर्थित नेता रवि शंकर यादव ने कहा कि पिपराडीह रेलवे रैक प्वाइंट पर ट्रक एसोसिएशन मजदूरों का शोषण कर रही है और उनके हक के पैसों से रंगदारी वसूली जा रही है. वहीं, दूसरी तरफ ट्रक ओनर्स एसोसिएशन का दावा है कि पचास पैसे लिए जा रहे हैं वह पचास पैसे प्रति बोरी के हिसाब से डंप मालिक उन्हें रैक पॉइंट के संचालन के लिए दे रहे हैं. उन पचास पैसे से मजदूरों का कोई वास्ता नहीं है.
पिपराडीह रेलवे स्टेशन पर डेढ़ साल पहले कोडरमा स्टेशन से रैक पॉइंट शिफ्ट किया गया था. बहरहाल, कई महीनों तक इसी राजनीतिक घमासान के कारण डंप मालिकों ने कई महीनों तक पिपराडीह स्टेशन से रैक की लोडिंग और अनलोडिंग बंद रखी थी, लेकिन जैसे ही इस रैक पॉइंट से लोडिंग अनलोडिंग का काम शुरू हुआ विवाद बढ़ गया. इस विवाद में यहां काम करने वाले 225 मजदूर भी दो गुटों में बटे नजर आ रहे हैं.
एक गुट के मजदूरों का कहना है कि उसके मजदूरी का पचास पैसा प्रति बोरा रंगदारी लिया जा रहा है. वहीं, दूसरे गुट के मजदूरों का कहना है कि जो मजदूरी उन्हें कोडरमा के तिलैया रैक पॉइंट पर मिलती थी, वहीं, मजदूरी उन्हें यहां भी मिल रही हैं और उन लोगों से कोई रंगदारी नहीं वसूली जा रही है.