झारखण्ड वाणी

सच सोच और समाधान

जापान से होप उपग्रह को सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया है

मंगल पर संयुक्त अरब अमीरात का ‘होप’

Ambuj Kumar Kunal Sarangi width Anshar Khan ADJ Kamlesh Jitendra Rais Rozvi Rishi Mishra Rina Gupta

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के मंगल ग्रह के लिए ऐतिहासिक अंतरिक्ष अभियान की शुरुआत हो चुकी है. इस अभियान के लिए उपग्रह को जापान से छोड़ा गया है
होप नामक इस उपग्रह को तनेगाशिमा अंतरिक्ष केंद्र से एच2-ए नामक रॉकेट के ज़रिए भेजा गया है और अब यह 50 करोड़ किलोमीटर की दूरी तय करके मंगल ग्रह के मौसम और जलवायु का अध्ययन करेगा. ख़राब मौसम के कारण इस अभियान को दो बार टालना पड़ा था. होप उपग्रह के फ़रवरी 2021 तक मंगल तक पहुंचने की संभावना है, यह तारीख़ इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उस समय संयुक्त अरब अमीरात के गठन की 50वीं सालगिरह भी है. यूएई का यह अंतरिक्ष अभियान मंगल ग्रह के लिए इस महीने शुरू होने वाले अभियानों में से एक है.

मंगल पर क्यों जा रहा है यूएई?
अंतरिक्ष यानों के उत्पादन और डिज़ाइनिंग का संयुक्त अरब अमीरात के पास बहुत मामूली अनुभव है. लेकिन इसके बावजूद यूएई वो करने की कोशिश कर रहा है जो अब तक केवल अमरीका, रूस, यूरोप और भारत करने में कामयाब रहे हैं. लेकिन ये संयुक्त अरब अमीरात के लोगों की महत्वाकांक्षा को बयान करता है कि वो इस चुनौती के लिए तैयार हैं.  और जब ये मंगल पर पहुँचेगा, तो उम्मीद की जा रही है कि इससे विज्ञान की नई सूचना, मंगल के वातावरण के बारे में ताज़ा जानकारी सामने आएगी. ख़ासकर वैज्ञानिकों को लगता है कि ‘होप’ मिशन से शायद ये पता चल पाए कि मंगल पर ऐसा क्या हुआ कि उस पर हवा और पानी दोनों ख़त्म हो गए. ‘होप’ मिशन को अरब जगत में प्रेरणा के एक बहुत बड़े स्रोत के रूप में देखा जा रहा है. उम्मीद है कि इससे संयुक्त अरब अमीरात के नौजवानों और अरब दुनिया के बच्चों का विज्ञान के प्रति रुझान बढ़ेगा.

यूएई की सरकार देश की अर्थव्यवस्था की निर्भरता तेल और गैस से हटाकर भविष्य में ज्ञान पर आधारित अर्थव्यवस्था की ओर ले जाना चाहते हैं.

लेकिन हमेशा की तरह जब बात मंगल ग्रह की होती है तो इसका जोखिम भी बहुत ज़्यादा है. लाल ग्रह पर भेजे गए अब तक के सभी अभियानों में आधे नाकाम रहे हैं.

‘होप’ मिशन के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ओमरान शराफ़ को इसके ख़तरों का अंदाज़ा है लेकिन वे ज़ोर देकर कहते हैं कि उनका देश सही दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है.

उन्होंने बीबीसी न्यूज़ से कहा, “ये एक रिसर्च और डेवलपमेंट मिशन है और हां, इसमें नाकामी भी मिल सकती है. हालांकि एक राष्ट्र के तौर पर तरक्की करने में नाकाम होना कोई विकल्प नहीं होता यूएई इस मिशन से जो क्षमता हासिल करने वाला है और इस देश में जो ज्ञान आएगा, यही बात सबसे ज़्यादा मायने रखती है.”

मंगल पर ‘होप’ मिशन का मक़सद

संयुक्त अरब अमीरात मंगल ग्रह पर पहुँचकर वो नहीं करना चाहता है जो जानकारी दूसरे देश पहले ही हासिल कर चुके हैं.

इसके लिए वे अमरीका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा के पास गए. नासा ने मंगल मिशन के लिए एक सलाहकार समिति ‘मार्क्स एक्सप्लोरेशन प्रोग्राम एनालिसिस ग्रुप’ (एमईपीएजी) बना रखी है.

उन्होंने पूछा कि यूएई ऐसा क्या रिसर्च करे कि मौजूदा उपलब्ध जानकारी में इज़ाफ़ा हो सके. एमईपीएजी की सिफारिशों के आधार पर मिशन होप का लक्ष्य तय किया गया.

एक पंक्ति में कहें तो संयुक्त अरब अमीरात का सैटेलाइट इस बात का अध्ययन करेगा कि वातावरण में ऊर्जा किस तरह से गति करती है. ऊपर से नीचे तक, दिन के पूरे वक्त और साल के सभी मौसमों में. ये सैटेलाइट मंगल पर फैली धूल का भी अध्ययन करेगा. इसी धूल के कारण मंगल का तापमान प्रभावित होता है.

About Post Author