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लेखक त्रिपाठी सिया रमण के सम्मान में

जमशेदपुर :आज 14 फरवरी को टेल्को कॉलोनी के कामधेनु इनक्लेव में सी ब्लॉक के श्री अमलेन्दु के फ्लैट संख्या 207 में उनके पिता प्रसिद्ध कवि एवं लेखक त्रिपाठी सियारमण के सम्मान में एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। श्री त्रिपाठी डी ए वी स्नातकोत्तर महाविद्यालय सिवान के हिंदी विभाग के अध्यक्ष और प्रभारी प्राचार्य रहे हैं। इन्होंने अनेकों पुस्तकें लिखी हैं और दर्जनों पत्र-पत्रिकाओं का संपादन किया है। अभी कल ही भोजपुरी साहित्य परिषद जमशेदपुर के द्वारा इनका सम्मान किया गया है। श्री त्रिपाठी के द्वारा लिखित काव्य संग्रह दिवंगता मां के नाम अंतिम पाती बहुत प्रसिद्ध हुई है। इस अवसर पर डॉ अजय किशोर चौबे ने त्रिपाठी की भाषा शैली साहित्य और समाज में योगदान पर अपना वक्तव्य देते हुए कहा कि उनका व्यक्तित्व अपने आप में एक काव्य है और जो उनके संपर्क में आता है वह अनायास कवि बन जाता है। श्री त्रिपाठी बिहार पेंशनर समाज की सिवान शाखा के वर्षों तक सचिव रहे हैं। इस हैसियत से उन्होंने समाज के उत्थान के लिए महती प्रयास किया है। 90 वर्ष की उम्र में भी वे साहित्य संस्था चला रहे हैं और अनवरत लेखन कार्य कर रहे हैं। इस अवसर पर शहर के प्रसिद्ध कवि चिकित्सक एवं समाजसेवी आदि कवि गोष्ठी में उनके अभिनंदन के लिए उपस्थित थे। कवि गोष्ठी का संचालन सरोज सिंह मधुप ने किया। इसकी अध्यक्षता स्वयं त्रिपाठी सियारमण ने की। धन्यवाद ज्ञापन श्री शिवनंदन के द्वारा किया गया। उपस्थित लोगों में प्रसिद्ध कवि अरविंद विद्रोही, जो जमशेदपुर भोजपुरी साहित्य परिषद के समर्पित कार्यकर्ता और उन्नायक हैं श्री अमलेन्दु जो जमशेदपुर पब्लिक स्कूल में वरिष्ठ स्नातकोत्तर हिंदी शिक्षक हैं, शिवरंजन, जो टाटा स्टील के सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं डॉ अजय किशोर चौबे, जो समर्पित समाजसेवी और चिकित्सक हैं सरोज सिंह मधुप, जो सेवानिवृत्त शिक्षक एवं प्रसिद्ध साहित्यकार कवि और लेखक हैं ने अपनी कविताएं सुनाईं। श्री विद्रोही ने अपनी कविताओं में हास्य और व्यंग का अनूठा संगम प्रस्तुत करते हुए वर्तमान राजनैतिक परिदृश्य में सिर्फ विरोध के लिए झूठा विरोध दिखलाने की प्रवृत्ति पर अपना विचार रखा शिवरंजन ने कविता के नए स्वरूप और सोशल मीडिया पर कविता के प्रसार का बड़ा आकर्षक उदाहरण प्रस्तुत किया। डॉ अजय किशोर ने अपनी व्यस्त दिनचर्या के बीच कविता नहीं करने की असमर्थता बतलाते हुए अपनी पीड़ा को कविता के रूप में प्रस्तुत किया। श्री मधुप ने भोजपुरी में गजल विधा का मनमोहक उदाहरण प्रस्तुत किया और वर्तमान ज्वलंत विषयों पर अपनी कविताएं सुना कर मुग्ध कर लिया। श्री अमलेन्दु ने जीवन संघर्ष में पराजित एक व्यक्ति की कथा को बड़ी मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया और बतलाया कि कभी-कभी पूरी ईमानदारी से कर्म करने पर भी अपेक्षित फल नहीं मिल पाता है। श्री त्रिपाठी सियारमण कैसे गाऊ गीत सखी जैसी मार्मिक कविता प्रस्तुत की और यह बतलाया कि जब अपने जीवन में दर्द भरा हो तो उधार की हंसी नहीं आ सकती और संत्रास ग्रस्त मन से भैरवी राग नहीं गाया जा सकता।