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कोरोना ने किया छात्रों के मानसिक और शारीरिक विकास को प्रभावित, मनोदशा पर पड़ रहा प्रतिकूल असर

कुणाल सारंगी

कोरोना के कारण लोग सिमट से गए हैं. पढ़ाई हो रही है, लेकिन स्कूल-कॉलेज खुल नहीं रहे. ऑनलाइन पढ़ाई तो हो रही है, लेकिन दूसरी एक्टिविटी बंद हैं. घरों में अघोषित कैद की वजह से छात्रों के मानसिक, शारीरिक और बौद्धिक विकास पर असर पड़ रहा है.

सरायकेला: कोरोना के कारण उत्पन्न हुए वैश्विक संकट ने लोगों की दिनचर्या ही बदलकर रख दी है. बाहर घूमने के बजाय अब लोग घरों में दुबकने को मजबूर हो गए हैं. कुछ ऐसा ही हाल स्कूलों का भी है जहां पढ़ाई के साथ-साथ बच्चे कई तरह के खेलकूद और नृत्य-संगीत में हिस्सा लेते थे और मनोरंजन करते थे, जिन पर अब ब्रेक लग चुका है.
कोरोना के कारण वर्तमान समय में छात्र घर बैठे ऑनलाइन शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं. बीते चार महीनों से क्लासरूम कल्चर पूरी तरह से बंद है. अब ऑनलाइन शिक्षा ही एकमात्र सहारा है. ऐसे में छात्र ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई तो कर ले रहे हैं लेकिन स्कूल में होने वाले को-करिकुलर एक्टिविटी, खेलकूद और नृत्य-संगीत अब पूरी तरह बंद हैं. जिसका प्रतिकूल असर छात्रों पर पड़ रहा है.
कोरोना का संकट काल बीत जाने के बाद छात्रों की मानसिक प्रवृत्ति को बदलने में काफी वक्त लग सकता है. जानकार बताते हैं कि संक्रमण काल खत्म होने के बाद जब परिस्थितियां सामान्य होगी तब लंबे समय से एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी से कटकर रह रहे छात्रों को इन से जोड़ने के लिए एक बार फिर से मशक्कत करनी पड़ेगी. वहीं छात्रों को विशेष काउंसलिंग की भी जरूरत पड़ सकती है.
क्रिकेट, नाटक, संगीत, मार्शल आर्ट और खेलकूद जैसी गतिविधियों से जुड़े छात्र लॉकडाउन की अवधि में स्कूल बंद होने के कारण अपनी शारीरिक स्फूर्ति खो रहे हैं. खासकर स्कूल स्तर के खिलाड़ी जो रोजाना खेल के मैदान में घंटों पसीना बहाते थे वे फिलहाल घरों की दीवारों के बीच रहने को विवश हैं. हालांकि सरकार की तरफ से खेलकूद की अनुमति तो प्रदान की गई है लेकिन फिर भी स्कूली स्तर के खिलाड़ियों की संख्या अब भी मैदानों में कम है. ऐसे में स्कूली छात्रों के शारीरिक विकास पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ रहा है.
कुछ स्कूलों की तरफ से एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी भी ऑनलाइन शुरू की गई है. लेकिन छात्र भी यह मानते हैं कि पढ़ाई हो या एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी यह ऑनलाइन से ज्यादा ऑफलाइन ही कारगर होते हैं. क्लासरूम हो या खेल का मैदान या संगीत की कक्षा जब छात्रों के रूबरू होकर उन्हें ट्रेनिंग दी जाती है तो वह छात्रों के विकास में मददगार साबित होता है. ऐसे में एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी ऑनलाइन कराया जाना महज कोरम पूरा होने के समान है.
वैश्विक महामारी के इस दौर में जहां स्कूल बंद हैं और स्कूलों में होने वाले सह पाठ्यक्रम कार्यक्रम भी ठंडे बस्ते में है. ऐसे में इनसे जुड़े शिक्षकों के सामने भी विपरीत परिस्थितियां उभर कर सामने आ रही है. संगीत की शिक्षिका प्रीति श्रीवास्तव बताती हैं कि 4 महीने से स्कूल आना-जाना पूरी तरह से बंद है और संगीत को लेकर जो एक्स्ट्रा क्लासेस घर पर चलते थे वह भी बंद हो चुके हैं, ऐसे में उनके सामने नौकरी खोने का लगातार खतरा मंडरा रहा है. प्रीति श्रीवास्तव बताती हैं कि इन्होंने सोशल डिस्टेंसिंग के तहत ऑफलाइन क्लास चलाने का निर्णय लिया, लेकिन संक्रमण
के भय से अभिभावकों ने बच्चों को नहीं भेजा. लाजिमी है कि बच्चों का मानसिक बौद्धिक और शारीरिक विकास इस दौरान प्रभावित हो रहा है.