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कोरोना के कारण सड़क किनारे होटलों और ढाबों में धूल फांक रही कुर्सियां, 60 फीसदी कारीगरों की हो गई छुट्टी

कुणाल सारंगी

पश्चिमी सिंहभूम से गुजरने वाला नेशनल हाइवे 75 यूपी को ओडिशा से जोड़ता है. इस रास्ते से गुजरने वाले लोग चाईबासा में झारखंडी व्यंजनों का स्वाद लेने से नहीं चूकते. लेकिन लॉकडाउन लगने के बाद हाईवे के होटल और ढाबा व्यवसायों की अर्थव्यवस्था बिगड़ गई है.

चाईबासा: कोरोना महामारी के दौर में राजमार्गों के साथ सड़क किनारे व्यवसाय करने वाले लोगों को घातक झटका लगा है. भारी संख्या में लोगों की आजीविका राष्ट्रीय राजमार्गों के साथ-साथ सड़क किनारे व्यवसाय पर निर्भर है. लॉकडाउन लगने के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग-75 के साथ सड़क किनारे होटल, ढाबा के कारोबारियों की अर्थव्यवस्था बिगड़ गई है लॉकडाउन में छूट मिलने के बाद होटल और ढाबा संचालक अपना खर्चा तक नहीं निकाल पा रहे हैं, जिस कारण ढाबा और होटल संचालकों ने लगभग 80 से 90 प्रतिशत कर्मचारियों को काम से हटा दिया है. होटल एवं सड़क किनारे संचालित ढाबों में ग्राहक नहीं के बराबर आ रहे हैं. ऐसे में कर्मचारियों की सैलरी भी निकाल पाना उनके लिए मुश्किल हो रहा है. सड़क किनारे के कई होटल और ढाबे बंद हो चुके हैं.
सड़क किनारे संचालित होटल एवं ढाबों में लॉकडाउन से पहले 14 से 15 कर्मचारी काम किया करते थे. वहीं, अब मात्र 3 से 4 कर्मचारी ही काम कर रहे हैं. संचालकों की मानें तो इनका वेतन भी बड़ी मुश्किल से निकाल पा रहे हैं. कोरोना संक्रमण काल में उनका धंधा पूरी तरह से चौपट कर दिया है. ग्राहकों के नहीं आने के कारण होटलों एवं ढाबा में रखें टेबल कुर्सियों पर धूल इकट्ठा हो रही हैं.
ढाबा संचालक वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता बताते हैं कि लॉकडाउन के कारण स्थिति काफी खराब हो गई है. गाड़ियां भी बहुत कम चल रही है. होटल में बैठा कर खिलाने की मनाही है बहुत कम लोग ही पार्सल ले जाते हैं. लाइन होटल संचालक चरण हेम्ब्रम बताते हैं कि लॉकडाउन के कारण ट्रक वाले भी उनके होटल में नहीं आ रहे हैं. होटल की स्थिति काफी खराब हो गई है. पहले होटल में 14 कर्मचारी हुआ करते थे अब मात्र 4 ही कर्मचारी हैं उनके लिए भी वेतन अपनी जेब से देना पड़ रहा है.