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कृषि बिल के खिलाफ कांग्रेस ने निकाला विरोध मार्च, राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन

कृषि बिल के खिलाफ कांग्रेस देशव्यापी आंदोलन कर रही है. देश भर में केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन हो रहा है. रांची में भी कांग्रेसियों ने विरोध मार्च निकाला. मार्च में प्रदेश कांग्रेस प्रभारी आरपीएन सिंह,प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर उरांव सहित कई बड़े नेताओं की मौजूदगी रही.

रांचीः केंद्र सरकार द्वारा कृषि सुधार विधेयक पारित करने के खिलाफ कांग्रेस देश भर में आंदोलन कर रही है. इसी के तहत झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भी सोमवार को मोरहाबादी मैदान स्थित बापू वाटिका से राजभवन तक विरोध मार्च किया है और राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा है.
झारखंड प्रदेश कांग्रेस के कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस प्रभारी आरपीएन सिंह ने भी शिरकत की है. इस दौरान प्रदेश प्रभारी आरपीएन सिंह, प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर उरांव,विधायक दल के नेता आलमगीर आलम,सांसद धीरज साहू, विधायक इरफान अंसारी, प्रदीप यादव, बंधु तिर्की और कार्यकारी अध्यक्ष राजेश ठाकुर के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा है.
जिसमें केंद्र सरकार द्वारा पारित कृषि सुधार विधेयक को किसानों के खिलाफ बताया गया है. प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी आरपीएन सिंह ने कहा है कि जब तक इस विधेयक में एमएसपी के तहत मूल्य निर्धारित और मंडियों को नहीं जोड़ा जाएगा, तब तक कांग्रेस इस विधेयक के खिलाफ आंदोलन करती रहेगी.
उन्होंने कहा है कि देश में 62 करोड़ किसान केंद्र सरकार के तीनों काले कानून के खिलाफ है, क्योंकि इसमे एमएसपी के तहत मूल्य निर्धारित नहीं किया गया है. उन्होंने कहा कि एमएसपी को अगर समाप्त कर दिया जाएगा. देश में फिर से भाजपा जमींदारी प्रथा ला रही है. बड़े-बड़े उद्योगपति एमएसपी के नीचे अनाज खरीदने लगेंगे, तो किसान बर्बाद हो जाएंगे.
उन्होंने कहा कि भाजपा कह रही है कि एमएसपी खत्म नहीं होगी, लेकिन यह सिर्फ झूठा आश्वासन है. उन्होंने कहा कि भाजपा ने कहा था कि 15 लाख रुपए देंगे, दो करोड़ नौकरियां हर वर्ष देंगे, लेकिन कुछ भी नहीं दिया गया. ऐसे में भाजपा पर विश्वास नही किया जा सकता है, जब तक एमएसपी और मंडियों का कानून में प्रावधान नहीं होगा. तब तक आंदोलन जारी रहेगी.
वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रामेश्वर उरांव ने कहा कि राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा गया है. उन्होंने कहा कि राज्यपाल को अवगत कराया गया है कि कांग्रेस पार्टी और देश के किसान इस विधेयक को किसान विरोधी मानते हैं.
उन्होंने कहा कि इससे किसानों का फायदा नहीं होकर महाजनी प्रथा को बढ़ावा मिलेगा. उन्होंने कहा कि पहले गांव में व्यापारी जब आते थे तो खेती के लिए पैसा देते थे और किसान की जब फसल आती थी तो 40 प्रतिशत पहले ले लेते थे, जबकि 60 प्रतिशत किसानों के पास रहती थी उपज को लेकर सारा खर्चा किसान को ही करना पड़ता था. ऐसे में व्यापारी इस विधेयक को लेकर पूंजीपति आएंगे और कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से किसानों को नुकसान होगा. इससे भी अवगत कराया गया है.