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जमशेदपुर में कोरोना संक्रमण से तीन लोगों की हुई मौत, मरीजों संख्या हुई 2660

Ambuj Kumar Kunal Sarangi width Anshar Khan ADJ Kamlesh Jitendra Rais Rozvi Rishi Mishra Rina Gupta

जमशेदपुर जिले में आज कोरोना से तीन व्यक्तियों की मौत होने का मामला सामने आया है. इसी के साथ जिले में कोरोना से मरने वालों की संख्या 75 पहुंची है. वहीं कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 2660 हो गई है.

जमशेदपुर: जिले में कोरोना का कहर बदस्तूर जारी है. आज कोरोना से तीन व्यक्तियों की मौत हुई है. वहीं जिले में कोरोना से मरने वालों की संख्या 75 तक जा पहुंची है. इसी कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 2660 जिले में टीएमएच (टाटा मुख्य अस्पताल) में आज सोनारी के खूंटाडीह के रहने वाले 75 वर्षीय व्यक्ति की मौत कोरोना के संक्रमण से हुई है. इन्हें सांस लेने में तकलीफ की शिकायत पर दो अगस्त को बिस्टुपुर स्थित टाटा मुख्य अस्पताल में भर्ती कराया गया था. दूसरी मौत जमशेदपुर के मुख्य व्यसायिक उद्योग से जुड़े एक व्यक्ति की हुई है. कोरोना पॉजिटिव के बाद से इन्हें टाटा मुख्य अस्पताल में भर्ती कराया गया था. आज कोरोना संक्रमित से इनकी मौत हो गई. तीसरी मौत साकची स्थित काशीडीह की एक 75 वर्षीय महिला की हुई है
वहीं, महिला को 3 अगस्त को सांस लेने और काफी समस्या को लेकर एडमिट किया गया था. कोरोना जांच के बाद उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी. स्थिति गंभीर होने पर उन्हें कोविड वार्ड के सीसीयू में शिफ्ट किया गया था, लेकिन आज उनकी मौत हो गई. उन्हें पूर्व से शूगर की शिकायत थी. जमशेदपुर में आज कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 2660 हो चुकी है,वहीं जिसमें से 1344कोरोना के मामले पूर्वी सिंहभूम में एक्टिव है. आज कोरोना से मौत का आंकड़ा 75 तक जा पहुंचा है.
वहीं दुसरी ओर टाटा मेन अस्पताल कोल्हान प्रमंडल के लोगों के वरदान साबित हो रहा है, लेकिन वर्तमान में लगातार मरीजों की संख्या बढ़ने से अस्पताल पर लोड बढ़ रहा है. हर दिन गंभीर मरीजों की संख्या बढ़ रही है. टीएमएच के आईसीयू में 56 बेड हैं जो पूरी तरह से भर गया है, लेकिन हर दिन ऐसे मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं जिन्हें वेंटिलेटर और आईसीयू की जरूरत पड़ रही है. वहीं मरीजों के बढ़ती संख्या को लेकर काफी कठिनाई हो रही है. टीएमएच और टाटा स्टील प्रबंधन ने अस्पताल में बढ़ते लोड को देखते हुए जीटी हॉस्टल 3, 2 और होटल जिंजर को अस्पताल के तौर
पर तैयार किया है, लेकिन वहां एसिमेटिक लक्षण वाले ही मरीजों को रखा जा रहा है.

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