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जमशेदपुर कोर्ट के स्टेनोग्राफर की टीएमएच में संदिग्ध मौत कोरोना की आशंका

कुणाल सारंगी

जमशेदपुर:जमशेदपुर व्यवहार न्यायालय के स्टेनोग्राफर 45 वर्षीय गजेंद्र कुमार की आज इलाज के दौरान टीएमएच में मौत हो गई है गजेंद्र कुमार डीएलएसए में स्टेनोग्राफर थे उनका आवास साकची गंडक रोड में है गुरुवार को देर रात वे अपने आवास में गिर गए थे आसपास के लोग पहुंचे और उन्हें टीएमएच ले जाया गया जहां आज तड़के उनकी मौत हो गई इस बात की आशंका है की गजेंद्र कुमार कोरोना वायरस से प्रभावित है हालांकि उनकी कोरोना टेस्ट की रिपोर्ट अभी आई नहीं है उल्लेखनीय है कि अधिवक्ता हत्याकांड में अपराधियों की गिरफ्तारी के बाद अधिवक्ताओं ने आज कोर्ट की कार्रवाई में हिस्सा लिया

कोर्ट के स्टाफ की मौत के बाद अधिवक्ताओं ने फिर कोर्ट को बंद करने की मांग संक्रमण के खतरे की आशंका को देखते हुए अधिवक्ताओं के एक समूह ने बंद करने की मांग की अधिवक्ताओं का कहना है की कोर्ट में पुलिस अधिवक्ता और मुकदमे की पैरवी के लिए कई लोगों का आना जाना होता है संभव है कि इससे करोना का संक्रमण फैले वही अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू ने बताया कि कोर्ट के एक नंबर गेट पर ड्यूटी करने वाली तीन महिला आरक्षी बीमार बतायी जाती हैं आशंका है कि उनमें कोरोना संक्रमण हो इस को ध्यान में रखते हुए अधिवक्ताओं ने कोर्ट की करवाई को तत्काल प्रभाव से कुछ समय के लिए बंद करने की मुखालफत की है

बार के अध्यक्ष और सचिव अधिवक्ता हत्याकांड के किसी भी आरोपी का नहीं करेंगे पैरवी और अन्य को विवेक पर छोड़ा गया।
वहीं जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष लाला अजीत कुमार अंबष्ठ और सचिव अनिल कुमार तिवारी ने एक प्रेस बयान में कहां है कि वह लोग अधिवक्ता प्रकाश यादव हत्याकांड के आरोपियों की पैरवी नहीं करेंगे साथ ही यह भी कहा है की अन्य अधिवक्ता पर कोई पाबंदी नहीं वह चाहे तो किसी की पैरवी कर सकते हैं यानी अधिवक्ता कांड से जुड़े हुए आरोपियों की पैरवी भी कर सकते हैं इस बात पर आज कोर्ट में अच्छी खासी प्रतिक्रिया देखी गई अधिवक्ताओं का कहना है कि यह दोहरा मापदंड है क्योंकि इसके पहले सोनारी के अधिवक्ता एन के सिंह की हुई हत्या में शामिल लोगों के खिलाफ बार एसोसिएशन ने किसी भी अधिवक्ता को उनकी पैरवी करने पर रोक लगा दी थी अन्य घटनाओं में भी वकील के साथ कुछ होता है तो सामूहिक निर्णय लिए जाते हैं लेकिन प्रकाश यादव हत्याकांड में वार की ओर से केवल अध्यक्ष और सचिव ही आरोपियों के मुकदमे की पैरवी नहीं करेंगे अन्य को उनके स्वयं के विवेक पर छोड़ दिया गया है