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झारखंड में आक्रामक हुआ कोरोना संक्रमण

कुणाल सारंगी

 

रांची। राज्य में कोरोना संक्रमण पहले ज्यादा आक्रामक हो गया है। जून के अंतिम दो सप्ताह के बाद से ही  कोरोना वायरस के असर में अंतर देखा जा रहा है। पहले की तुलना में संक्रमित मरीजों में इसका असर गंभीर होता दिख रहा है। यही वजह है कि मरीजों को ठीक होने में अब ज्यादा समय लग रहा है। नतीजतन राज्य में एक्टिव मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है।

अस्पतालों का लोड बढ़ रहा है। रिम्स में कोरोना मरीजों का उपचार कर रहे डॉ ऋषि गुड़िया कहते हैं कि यह सब हुआ है दिल्ली, मुंबई का वायरस पहुंचने की वजह से। डॉ देवेश कुमार कहते हैं कि मरीज के ठीक होने में उसके शरीर में वायरस का लोड (वायरल लोड) कितना है उसका भी असर पड़ता है। जिस मरीज का वायरल लोड ज्यादा है, उसे ठीक होने में भी समय लगता है। वह कहते हैं पहले की तुलना में अब के मरीजों में वायरल लोड बढ़ा है।

 

उदाहरण के तौर पर रिम्स के तीन डॉक्टर पिछले 20 दिनों से कोविड वार्ड में भर्ती हैं। अभी उनकी रिपोर्ट निगेटिव नहीं हुई है। धनबाद की एक महिला की 17 दिनों के बाद निगेटिव रिपोर्ट आई है। जोड़ा तालाब और कोकर का एक मरीज 15 दिनों में स्वस्थ हुआ है। पहले 8 से 10 दिन में मरीज स्वस्थ होकर घर लौट जाते थे लेकिन अब 15 से 20 दिन का समय लग रहा है।

100 मरीज में एक की हो रही मौत : कोविड 19 के नोडल अफसर डॉ ब्रजेश मिश्रा कहते हैं कि स्ट्रेन बदलने की वजह से वायरस की आक्रामकता बढ़ती जा रही है। पहले जहां मरीजों में लक्षण दिखते ही नहीं थे, अब दिखने लगे हैं। मरीजों की मौत का आंकड़ा भी बढ़ता जा रहा है। जून तक राज्य में मौत का प्रतिशत महज .60 था जो बढ़कर 1.09 पहुंच गया है। यानी हर 100 में एक से अधिक मरीज की मौत हो रही है।

नेचर बदल रहा है वायरस : डॉ मिश्रा कहते हैं कि राज्य में मध्य जून तक वायरस की आक्रामकता कम थी। लेकिन पिछले लगभग एक माह से इसका रूप काफी बदल गया है। इसकी वजह से मरीजों में अलग अलग लक्षणों का पता चलने लगा है। डॉ मिश्रा का कहना है कि कोरोना वायरस मरीजों की सांसों पर ही नहीं, बल्कि भूख पर भी असर डाल रहा है। लोगों की संवेदनाएं प्रभावित हो रही है। गंध और स्वाद की क्षमता को भी प्रभावित कर रहा है।

जुलाई में 97 मरीज की मौत : राज्य में 30 जून तक कुल 2490 मरीज मिले थे। इनमें से महज 15 की मौत हुई थी। दूसरी तरफ केवल जुलाई के 29 दिनों में 7713 (तीन गुना) मरीज मिले चुके हैं। इनमें 97 की मौत हो चुकी है। यानी जुलाई में मिले मरीजों में से 1.25 प्रतिशत मरीज की मौत हुई है।

रिकवरी रेट में 35 प्रतिशत कमी : वायरस का बढ़ते असर की वजह से रिकवरी रेट काफी घटा है। जून की तुलना में जुलाई में रिकवरी रेट में 35 प्रतिशत की गिरावट आई है। 30 जून को राज्य का रिकवरी रेट 75.66 प्रतिशत था जो घटकर महज 40 प्रतिशत रह गया है। यही नहीं 30 जून को राज्य में स्वस्थ हो चुके मरीजों की संख्या 1884 थी, जबकि एक्टिव केस महज 591 थे। यानी ठीक हो चुके मरीजों की संख्या एक्टिव केस से तीन गुना थी। जबकि अब 29 दिन बाद एक्टिव केस की संख्या ठीक हो चुके मरीजों से डेढ़गुनी हो चुकी है। अभी ठीक हो चुके मरीज जहां 4061 हैं वहीं एक्टिव केस की संख्या 6048 है।

गंभीर मरीजों को खतरा ज्यादा : रिम्स के मेडिसिन विभाग के एचओडी डॉ जेके मित्रा कहते हैं कि कोरोना वायरस की आक्रामता की वजह से ही इधर के दिनों में मौत का आंकड़ा बढ़ा है। डॉ मित्रा ने कहा कि मौत के पीछे कोरोना तो परोक्ष कारण है। लेकिन प्रत्यक्ष कारण और भी है। जिसमें सबसे पहला है उम्र, उसके बाद डायबिटीज, हार्ट डिजीज, ब्लड प्रेशर व ओबेसिटी भी महत्वपूर्ण कारण है। उनका कहना है कि इन बीमारियों की वजह से पहले से ही शरीर का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है।

ऐसे समझें राज्यों में संक्रमण की स्थिति
30 जून      29 जुलाई
कुल मरीज     2490       10203
एक्टिव केस      591         6048
स्वस्थ मरीज   1884        4061
डेथ रेट              15           112