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धोखा: बंद पड़ी टायो ने पिछली तिमाही में दिखाया मुनाफा

Ambuj Kumar Kunal Sarangi width Anshar Khan ADJ Kamlesh Jitendra Rais Rozvi Rishi Mishra Rina Gupta

जमशेदपुर: टायो कंपनी के आर०पी० अनीश अग्रवाल द्वारा जारी वर्ष 2019-2020 के चौथे तिमाही के वित्तीय रिपोर्ट मे मुनाफा दिखया गया है।
विदित हो कि टायो कम्पनी वर्ष 2016 से बंद पड़ी है। इसके कुछ कर्मचारी कम्पनी द्वारा जारी विभिन्न स्कीम के द्वारा अलग हुए है और कुछ बंदी के विरोध में आंदोलन कर रहे हैं। इसी संबंध में विभिन्न मामले भिन्न न्यायालयों में लंबित है।

कंपनी को एनसीएलटी (NCLT) के द्वारा अप्रैल 2019 में सेक्शन 9 (आईपीसी) के तहत सी आई आर पी में मंजूर किया गया और श्रीमती विनीता अग्रवाल को आईआरपी (IRP) नियुक्त किया गया। इसके तुरंत बाद श्रीमती विनीता अग्रवाल द्वारा कमिटी आफ क्रेडिटर्स (COC) का गठन किया गया, जिसमें झारखंड विद्युत बोर्ड (JBVNL) और कर्मचारी, आदि को प्रमुख सदस्यों की सूची में रखा गया। अपनी पहले बैठक में सीओसी ने श्रीमती अग्रवाल को आरपी (RP) नियुक्त कर लिया गया। आरपी (RP) द्वारा मंजूर दावो की राशियों से नाराज जेबीवीएनएल और कर्मचारियों ने श्रीमती विनीता अग्रवाल के विरोध में एनसीएलटी (NCCLT) कोलकाता में याचिका डाली, जिसमें उन्होंने आरपी (RP) पर आरोप लगाते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निष्कासित करने का अनुरोध किया गया। इसके फलस्वरूप ट्रिब्यूनल ने श्रीमती अग्रवाल को हटाया लेकिन उन पर लगे सारे आरोपों को खारिज कर दिया और श्री अनीश अग्रवाल, रांची को RP नियुक्त कर दिया।
श्री अनीश अग्रवाल ने प्रभाव में आते ही पहले द्वारा मंजूर दावो की राशि को बढ़ाकर लगभग दस गुना कर दिया जिसे जेबीवीएनएल (JBVNL) का वोटिंग शेयर (Voting Share) बढ़कर लगभग 90% हो गया। इसके अतिरिक्त बहुत सारे पूर्वाग्रहयुक्त कदम ऐसे उठाए गए, जो कि एकपक्षीय प्रतीत होता है। उदाहरण स्वरूप पुराने सी ओ सी (COC) के सदस्य का निष्कासन, नए ऑडिटर की नियुक्ति और पुराने RP द्वारा किए गए कुछ कार्यों को अतक्रिक ढंग से खत्म करना, इत्यादि शामिल है।
अभी जारी कंपनी की वित्तीय रिपोर्ट में चौथे तिमाही में मुनाफा दिखाया गया है। अगर रिपोर्ट को ध्यान से देखा जाए तो इसमें बहुत सारे वित्तीय सूचक नियमों और बिंदुओं को जान बूझ कर छोड़ो गया है। BSE में दायर किए गए पिछले तिमाही और वित्त वर्ष 2019-2020 के परिणाम में रेसोल्यूशन प्रोफेशनल (RP) द्वारा मुनाफा दिखाया गया है।इसमें रु 684 लाख का लाभ दिखाया गया है। इस वित्तीय कारीगिरी के परिणाम तक पहुंचने में पिछली तिमाहियों में दर्शाए गए खर्चों को उलट दिया गया है।ताकि अंतिम तिमाही में अधिक लाभ दिखाया जा सके।
रब्स एंड कंपनी जो टायो के नए ऑडिटर है उन्होंने अपने नोट में बताया है कि वित्तीय परिणाम इंडस (INDAS) निर्देशों के अनुसार बनाए गए हैं। ऑडिटर ने बताया है कि एक रेसोल्यूशन योजना एनसीएलटी में दाखिल किया गया हैं, जिसकी अभी वहां से मंजूरी मिलनी बाकी हैं परंतु सारे परिणाम को ऐसे मानकर प्रकाशित किया गया है मानो न्यायाधिकरण से मंजूरी मिल गई है। हालांकि ऐसा मानने का कोई औचित्य नहीं है और यह ऑडिटर की निष्पक्षता पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।
रब्स एंड कंपनी ने अपनी रिपोर्ट के चौथे बिंदु पर बताया है कि चौथी तिमाही में कोरोना के चलते कंपनी के काम काज पर भारी मुसीबत पड़ी है। यह आश्चर्य की बात है कि बंद कंपनी में कोरोना ऐसी क्या आफत पड़ गई ।कोरोना के चलते कंपनी में परिसंपत्तियों का मूल्यांकन नहीं किया गया है। ऑडिटर ने यह भी कहा है कि आर्थिक मंदी और पूंजी की महामारी के चलते टायो की नेटवर्थ में गिरावट दर्ज की गई है ।यह सामान्य से असहज लगता है कि बंद कंपनी को आर्थिक मंदी और पूंजी की मारामारी से क्या संबंध है। यहां यह भी जानना आवश्यक है कि रब्स एंड कंपनी का झारखंड बिजली वितरण निगम से कामकाजी संबंध रहा है।
अगर टायो के बैलेंस शीट पर गौर किया जाए तो यह जाहिर होता है कि पिछले वर्ष की आकिस्मिक देयताओ को मिटा दिया गया है जिसका कोई औचित्य नहीं है। इसी तरह जेबीवीएनएल के दावे को भी है लेखा-जोखा में नहीं दर्शाया गया है।  यहाँ यह भी जानना जरूरी है कि टायो का जेवीवीएनएल के साथ विभिन्न न्यायालयों में मामले लंबित है।
इस तरह के परिवेश में रेसोल्यूशन प्रोफेशनल अनीश अग्रवाल और ऑडिटर रब्स एंड कंपनी की भूमिका बेहद संदेहास्पद प्रतीत होती है। इनके द्वारा न्यायसम्मत वित्तीय लेखा-जोखा नहीं प्रस्तुत किया गया है। जिसका जिसमें कुछ लोगो को फायदा पहुंचाने की बू आती है।

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