झारखण्ड वाणी

सच सोच और समाधान

छुपे हो तुम कहाँ सूरज

Ambuj Kumar Kunal Sarangi width Anshar Khan ADJ Kamlesh Jitendra Rais Rozvi Rishi Mishra Rina Gupta

छुपे हो तुम कहाँ सूरज
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छुपे हो तुम कहाँ सूरज, पता दो उस ठिकाने का
अँधेरा जो घना उससे, इरादा आजमाने का

हमें आता है लड़ना भी, हमहीं लड़ना सिखाते हैं
ये सदियों की लड़ाई है, सभी को हक दिलाने का

कलम को भी चलाते हम, मशालें भी जलाते हम
तुम्हें जो चाहिए, थामो, मगर है साथ आने का

लहू भी एक सा अपना, हवा, पानी भी इक जैसा
सभी इन्सान इक जैसे, यही रिश्ता निभाने का

भला सोचो सुमन हमको, जरूरत क्या है बँटने की
अगर कुछ सोच से अँधे, उसे रस्ता दिखाने का

श्यामल सुमन

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