झारखण्ड वाणी

सच सोच और समाधान

चीन-नेपाल में उलझा भारत, उधर पाकिस्तान-बांग्लादेश में बढ़ी दोस्ती

Ambuj Kumar Kunal Sarangi width Anshar Khan ADJ Kamlesh Jitendra Rais Rozvi Rishi Mishra Rina Gupta

चंद हफ़्तों पहले बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमिन और पाकिस्तानी राजनयिक इमरान अहमद सिद्दीक़ी की हुई भेंट के अर्थ ढूंढे ही जा रहे थे कि बुधवार दोपहर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना को फ़ोन कर लंबी बातचीत की.

शेख़ हसीना के प्रेस सचिव एहसानुल करीम ने कहा है कि दोनों नेताओं के बीच तक़रीबन पंद्रह मिनट लंबी बातचीत हुई.

दो देशों के नेताओं के बीच फ़ोन पर वार्तालाप कोई अनसुनी बात नहीं, और इमरान ख़ान और शेख़ हसीना के बीच भी पहले फ़ोन पर बातें हुई हैं, लेकिन हाल के दिनों में पाकिस्तानी प्रेस में ये ख़बरें आ रही हैं कि तक़रीबन 50 साल पहले तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान से अलग होकर एक स्वतंत्र देश बनने वाले बांग्लादेश और पाकिस्तान दोनों ही अपने सर्द रिश्ते में गरमाहट लाने की कोशिश कर रहे हैं.

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री कार्यालय से जारी प्रेस रिलीज़ में कहा गया है कि बातचीत में इमरान ख़ान ने कोविड-19 और बाढ़ से बांग्लादेश में उपजे हालात के साथ-साथ ‘भारत के क़ब्ज़े वाले कश्मीर में मौजूद बुरे हालात पर अपने विचार रखे’ और शेख़ हसीना को पाकिस्तान आने का न्योता दिया.

राजधानी ढाका में हाल के दिनों में हुई मुलाक़ात और इन फ़ोन कॉल्स को भारत के सामरिक और कुटनीतिक हल्क़ों में कुछ लोग भारत के पूर्वी सीमा पर भी संभावित बदलाव के दस्तक के तौर पर देख रहे हैं.

धार्मिक रंग देने की कोशिश

पाकिस्तान यह कहकर कि ‘दोनों का धर्म और संस्कृति एक हैं,’ बांग्लादेश से नज़दीकी बढ़ाने की इस कोशिश को मज़हबी रंग देने की भी कोशिश कर रहा है.

पाकिस्तान की इस कोशिश को बांग्लादेश की राजनीति के जानकार ख़तरनाक मान रहे हैं क्योंकि इससे वहां मौजूद कट्टरपंथी इस्लामी समूहों को मज़बूती मिलेगी, जो हमेशा से भारत-विरोधी रहे हैं.

पाकिस्तानी उच्चायुक्त ने हाल में एक बयान में कहा है कि ‘हम हमारे भाई बांग्लादेश के साथ सभी क्षेत्रों में नज़दीकी रिश्ता चाहते हैं. हमारा इतिहास, मज़हब और संस्कृति एक है’.

1971 में पूर्वी पाकिस्तान – अब बांग्लादेश, हालांकि तत्कालीन पश्चिमी पाकिस्तान से जिन वजहों से अलग हुआ था उसमें सांस्कृतिक विभिन्नता एक बहुत बड़ी वजह थी और इन तक़रीबन 50 सालों में दोनों मुल्कों के बीच संबंध सर्द ही रहे हैं.

ढाका में पाकिस्तान के उच्चायुक्त इमरान अहमद सिद्दीक़ी ने पाकिस्तान-बांग्लादेश के संबंधों पर ये बयान एक जुलाई को बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमिन के साथ हुई मुलाक़ात के बाद दिया था.

इमरान अहमद सिद्दीक़ी और बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमिन के बीच ये मुलाक़ात वैसे समय में हुई है जब भारत अपने उत्तरी और पूर्वी मोर्चे पर चीन और नेपाल से निपटने में मशग़ूल रहा है.

एक जुलाई को हुई इस मुलाक़ात पर हालांकि बांग्लादेश विदेश मंत्रालय की तरफ़ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, और मंत्रालय से बीबीसी के इस बाबत पूछने पर इसे महज़ ‘अनौपचारिक भेंट’ बताया. लेकिन पाकिस्तानी उच्चायुक्त ने तुर्की समाचार एजेंसी अनादोलु को कहा कि ‘आगे की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने पर सहमति जताई.’

भारत की तरफ़ से इस पूरे मामले पर किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं आई है. बीबीसी के इस संबंध में विदेश मंत्रालय को भेजे गए संदेशों का भी कोई जवाब अबतक हासिल नहीं हुआ.

इस बीच सुत्रों के हवाले से कुछ जगहों पर इस तरह की ख़बरें आ रही हैं कि भारत ढाका के अपने दूतावास में ऊंचे ओहदों पर कुछ बदलाव करने जा रहा है.

भारतीय विदेश मंत्रालय के पूर्व सचिव और ढाका में भारत के पूर्व उच्चायुक्त पिनाक रंजन चक्रवर्ती कहते हैं, “बांग्लादेश में हमेशा एक धड़ा रहा है जो पाकिस्तान से नज़दीक रिश्ते चाहता रहा है और वो पाकिस्तान-बांग्लादेश के बंटवारे के पक्ष में भी नहीं था.”

रोहिंग्या मामले में मदद कर सकता है पाकिस्तान?

 

ढाका में भी दबे सुरों में कुछ व्यवसायिक हितों के ज़रिये पाकिस्तान से रिश्ते बेहतर बनाने की कोशिश को आगे बढ़ाने की बात हो रही है. हालांकि इस संबंध में कोई खुलकर बात करने को तैयार नहीं है.

 

कहा जा रहा है कि पाकिस्तान से बेहतर संबंध का पक्षधर तबक़ा किसी तरह बांग्लादेश की हुकूमत के ऊंचे ओहदों पर बैठे लोगों को इस बात के लिए राज़ी करने में सफल हो गया है कि देश की रोहिंग्या समस्या का हल और म्यंमार में उनकी वापसी में पाकिस्तान अहम भूमिका निभा सकता है.

बांग्लादेश में पिछले कई सालों से लगभग 10 लाख रोहिंग्या शरणार्थी रह रहे हैं जो इस छोटे से क्षेत्रफल के मुल्क पर जनसंख्या के घनत्व का दबाव बनाने के अलावा कई दूसरी तरह की मुश्किलें पैदा कर रहे हैं.

 

 

About Post Author