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चंद किस्तों से संवर रही है व्यापारियों की जिंदगी, रोजगार स्थापित कर बनेंगे आत्मनिर्भर

देश में कोविड-19 को लेकर किए गए लॉकडाउन में आर्थिक व्यवस्था के साथ आम जिंदगी पर व्यापक असर पड़ा है. सड़क किनारे फुटपाथ के दुकानदारों के अलावा बड़े व्यवसाय पर कोरोना के लॉकडाउन का प्रभाव पड़ा है. ऐसे में सरकार अपनी नई

योजनाओं से जमीनी स्तर से जिंदगी पटरी पर दौड़ाने के प्रयास में हैं.

जमशेदपुर: देश में कोरोना महामारी के कारण सरकार की ओर से जारी किए गए लॉकडाउन ने आर्थिक व्यवस्था के साथ-साथ आम जनजीवन के रफ्तार में लगाम लगा दिया है. वहीं सरकार की ओर से जमीनी स्तर से आर्थिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नए कदम उठाए गए हैं.
बता दें कि कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान सड़क किनारे ठेला लगाकर अपनी जिंदगी के पहिए को आगे बढ़ाने वाले पथ विक्रेताओं का पहिया पूरी तरह से थम गया है. ऐसे में केंद्र सरकार की ओर से प्रधानमंत्री पथ विक्रेता आत्म निर्भर योजना के तहत दस हजार रुपये का बैंकों से ऋण दिया जा रहा है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें.
जमशेदपुर के जुगसलाई नगर परिषद क्षेत्र में ठेला लगाकर या छोटे दुकान के जरिए रोजगार करने वालों को चिन्हित कर उन्हें सरकार की नई योजनाओं से अवगत कराया जा रहा है, जिसके तहत अब तक 200 से ज्यादा छोटे दुकानदार पथ विक्रेताओं ने जुगसलाई नगर परिषद में ऋण के लिए आवेदन दिया है.
1 जून 2020 से लागू की गई प्रधानमंत्री पथ विक्रेता आत्मनिर्भर योजना के तहत प्रत्येक निकाय में ठेला लगाकर या छोटे दुकान के जरिए रोजगार करने वालों को बैंकों से दिए जा रहे हैं, बैंक से मिलने वाली ऋण पर बैंक के ब्याज दर पर 7% की छूट दी गई है. और यह ऋण की राशि 12 महीने में चुकाना है. ऋण लेने वालों के लिए यह सुविधा दी गई है कि अगर वे ऑनलाइन तरीके से ऋण का भुगतान करते हैं, तो उन्हें 12 सौ रुपए तक का कैशबैक मिलेगा. इसके लिए सभी दुकानदारों को डिजिटल पेमेंट लेने के लिए कहा गया है. सभी ऋणधारी पथ विक्रेताओं के लिए एक पहचान पत्र बनाया जा रहा है
जुगसलाई नगर परिषद की सिटी मैनेजर ग्लेनिस मिंज ने बताया है कि पीएम पथ विक्रेता आत्मनिर्भर योजना के तहत जुगसलाई नगर परिषद क्षेत्र में कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान आर्थिक रूप से कमजोर पथ विक्रेता को चिन्हित किया गया है, जिनमें सौ से ज्यादा पथ विक्रेता का ऋण प्रस्तावित है, जबकि 20 के लगभग पथ विक्रेताओं का जिस बैंक में अकाउंट है. वहां से ऋण की राशि 10 हजार दिया गया है, जिससे वे अपने आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए दुकान लगाना शुरू किया है. उन्होंने बताया है कि जुगसलाई नगर परिषद क्षेत्र में और भी पथ विक्रेताओं को चिन्हित किया जा रहा है, जिससे बेरोजगारी दूर हो सके और उन्हें सरकार की योजना का पूरा लाभ मिल सके. सरकार की ओर से दी जा रही सुविधाओं की जानकारी मिलने पर आर्थिक रूप से पूरी तरह से कमजोर पथ विक्रेताओं को रोशनी की किरण दिखने लगी है और वे ऋण के लिए अपना आवेदन के साथ अन्य कागजात को लेकर नगर परिषद पहुंच रहे हैं. ऋण के लिए आवेदन करने आये सीताराम पासवान ने बताया है कि लॉकडाउन पूरी पूंजी खत्म हो गई है. ऋण लेकर ठेला लगाएंगे और कमाकर ऋण भी चुकाएंगे.
जुगसलाई नगर परिषद क्षेत्र में जिन पथ विक्रेताओं को ऋण मिल चुका है, वे दुकान लगाकर कमाने में लग गए हैं. सरकार की योजना के जरिए अपनी आर्थिक स्थिति को फिर से मजबूत करने में दिख रहे है, उन्हें इस योजना से राहत मिली है.
ठेला पर फल बेचने वाला अशोक प्रसाद ने बताया कि कोरोना के लॉकडाउन में आर्थिक स्थित खराब हो गई थी. जुगसलाई नगर परिषद से प्रधानमंत्री की इस योजना के तहत लोन मिला है. अब घर परिवार चला रहे है. समय पर लोन भी चुकाएंगे, लेकिन लोन पास कराने में उन्हें कोई रिश्वत नहीं देना पड़ा.
नमकीन नाश्ता बनाने वाले विरेन्द्र वर्मा बताते है कि धंधा पानी सब चौपट हो गया था, लेकिन सरकार की इस योजना के तहत लोन मिला है फिर से पूंजी बना रहे है. घर भी चलाना और समय पर लोन भी चुकाएंगे. कोरोना के कारण लगे लॉकडाउन में रोज कमाने खाने वालों पर व्यापक असर देखने को मिला है. वहीं इससे निपटने के लिए सरकार की आत्मनिर्भर योजना से जमीनी स्तर से आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, इससे इंकार नहीं किया जा सकता है.