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बोकारो में सरस्वती पूजा की भव्य तैयारी मूर्तियों को अंतिम रूप देने में जुटे कारीगर

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बोकारो में सरस्वती पूजा की भव्य तैयारी मूर्तियों को अंतिम रूप देने में जुटे कारीगर

बोकारो में धूमधाम से सरस्वती पूजा की तैयारी की जा रही है. कोरोना काल के बाद पहली बार भव्य पैमाने पर पूजा का आयोजन किया जा रहा है. इस वजह से मूर्तियों की डिमांड भी बढ़ी है.

बोकारोः इस बार 26 जनवरी को ही वसंत पंचमी यानि सरस्वती पूजा है. सरस्वती पूजा को लेकर मूर्तिकार अब मूर्तियों को अंतिम रूप दे रहे हैं. शैक्षणिक नगरी बोकारो में इस बार सरस्वती पूजा धूमधाम से मनाने की तैयारी की गई है. इस कारण करीब दो दर्जन से अधिक स्थानों पर मूर्तियों का निर्माण किया जा रहा है. जिसमें अधिकांश मूर्तियां करीब चार पांच फीट की है. समय से मूर्ति तैयार हो इसलिए कारीगर के परिवार के सदस्य भी पेंटिंग आदि का काम करने में जुटे हुए हैं.
अंतिम चरण में तैयारीः कारीगर मनोज पाल ने बताया कि वसंत पंचमी में विद्या की देवी मां सरस्वती की धूमधाम से पूजा की जाती है. खासकर स्कूलों और शैक्षणिक पूजा संस्थानों में मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित कर श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना की जाती है. मूर्तियों की मांग को देखते हुए इस बार पांच सौ से अधिक मूर्तियों का निर्माण किया गया है. जो शहर के विभिन्न हिस्सों में स्थापित की जाएगी.
बोकारो चास में कई जगह बनती है मूर्तियांः चास के जोधाडीह मोड़, महावीर चौक के साथ-साथ शहर के सेक्टर 12 मोड़, सेक्टर 4 जी, सेक्टर 9, रितुडीह आदि स्थानों पर बड़ी संख्या में मूर्तियों का निर्माण किया जाता है. पूजा को देखते हुए पश्चिम बंगाल के विभिन्न हिस्सों से करीगर पहुंचते हैं. मूर्तिकार ने बताया कि पहले के मुकाबले मूर्ति निर्माण थोड़ा महंगा हुआ है. लेकिन लोग अपनी पसंद की मूर्ति के बदले पैसे देने में हिचकते नहीं हैं. इस बार बड़े मूर्तियों की डिमांड अधिक देखी जा रही है. लेकिन बीते दो वर्षों में कोरोना के दौरान छोटी मूर्तियों का प्रचलन बढ़ा है. जिस कारण इस बार छोटी मूर्तियां ही अधिक बनाई गई. 900 से लेकर 5 हजार रुपए तक की मूर्तियां हैं. मूर्तिकार के अनुसार अब कई शैक्षणिक संस्थानों से बड़ी और भव्य मूर्तियों की डिमांड आ रही है

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