झारखण्ड वाणी

सच सोच और समाधान

बिल्कुल नहीं सहारे बदले

बिल्कुल नहीं सहारे बदले
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सूरज, चाँद, सितारे बदले
मेरे नहीं किनारे बदले

मैं सवाल बन खड़ा हमेशा
दुश्मन बदले, प्यारे बदले

भौतिकता की मोह में देखा
आस पास में सारे बदले

वैचारिकता छोड़ बढ़ोगे
तब गर्दिश के तारे बदले

गाया दरबारी जिसने भी
उसके वारे न्यारे बदले

छोड़ो सच को लिख सत्ता के
जितने वादे, नारे बदले

कलम उठाना सुमन फकीरी
बिल्कुल नहीं सहारे बदले

श्यामल सुमन