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बहुचर्चित पूनम हत्याकांड के आरोपी को पुलिस ने भेजा जेल, मामले को किया गया था रफा-दफा

बोकारो में 17 मई की रात को चतरोचट्टी थाना क्षेत्र के चिपरी निवासी सुकराम अगरिया की पत्नी पूनम देवी की हत्या हो गई थी. हत्या के इस मामले में यूडी केस दर्ज कर रफा दफा कर दिया गया था, जबकि महिला ने हत्या के चौबीस घंटे पहले थाना पहुंचकर लिखित आवेदन देते हुए अपनी जान बचाने की गुहार लगाई थी. इस मामले में पुलिस ने आरोपी बालेश्वर अगरिया को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया.

बोकारोः जिले के बेरमो अनुमंडल अंतर्गत गोमिया प्रखंड के चतरोचट्टी थाना क्षेत्र के बहुचर्चित पूनम देवी हत्याकांड के मुख्य आरोपी बालेश्वर अगरिया को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. तत्कालीन थाना प्रभारी मुकेश कुमार ने हत्या की इस घटना को यूडी केस दर्ज कर मामले को रफा-दफा कर दिया था. जबकि पूनम देवी ने मौत से ठीक एक दिन पहले ही उनके साथ अनहोनी की आशंका जाहिर कर चार लोगों के खिलाफ थाने में लिखित आवेदन दिया था.
थाना प्रभारी अनिल उरांव ने बताया कि पूनम देवी द्वारा दिया गया आवेदन और पोस्टमार्टम रिर्पोट के आधार पर बालेश्वर अगरिया को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है. इस संबंध में पुर्ननवीनीकरण कांड संख्या 34/20 भादवि की धारा 302 के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को मेडिकल और कोरोना जांच कराने के बाद न्यायालय के आदेश पर जेल भेज दिया गया है.
चार माह पूर्व 17 मई की रात को चतरोचट्टी थाना क्षेत्र के चिपरी निवासी सुकराम अगरिया की पत्नी पूनम देवी की हत्या हो गई थी. हत्या के इस मामले में यूडी दर्ज कर रफा दफा कर दिया था, जबकि महिला ने हत्या के 24 घंटे पहले 16 मई को थाना पहुंचकर लिखित आवेदन देते हुए अपनी जान बचाने की गुहार पुलिस से लगाई थी. इस पर बालेश्वर अगरिया सहित अन्य तीन लोगों के खिलाफ गाली ग्लौज और मारपीट करने का आरोप लगाया था. पूनम देवी को यह अशंका थी कि उसके साथ कुछ अनहोनी हो सकती है, लेकिन पुलिस ने उस पर एहतियात नहीं बरती. लिहाजा अगले ही दिन उसकी जान चली गई. ग्रमीणों का कहना है कि पुलिस मामले में गंभीरता दिखाई होती तो महिला की जान बचाई जा सकती थी
चतरोचट्टी पुलिस को जब 18 मई की सुबह पूनम देवी की मौत की जानकारी मिली तो वे घटनास्थल पर पहुंचे और प्राथमिक जांच पड़ताल किया. इसके बाद शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. इस संबंध में तत्कालीन थाना प्रभारी मुकेश कुमार ने पूनम देवी द्वारा एक दिन पहले दिया गया आवेदन पर कोई तहकीकात नहीं की और उसकी मौत को सल्फास के सेवन का मामला बना कर रफा दफा कर दिया, जबकि पोस्टमार्टम रिर्पोट में उसके गर्दन और गाल पर गहरे जख्म और चोट के निशान औैर अधिक ब्लीडिंग के कारण मौत की बात सामने आई.