झारखण्ड वाणी

सच सोच और समाधान

बाल प्रेम या स्त्री प्रेम?

कुणाल सारंगी

सुबह की यही कोई 10 बजे होंगे। पी एम सी एच के सभी विभाग में लोगों की काफी भीड़ थी। मैं भी अपने मरीज के साथ गैस्ट्रोलॉजी के पास खड़ा था। सभी लोग अपना नाम पुकारे जाने की प्रतीक्षा कर रहे थे। विभाग की नर्स बीच-बीच में मरीजों का नाम पुकार कर अंदर चली जाती थी। सभी लोग नाम पुकारे जाने के समय नर्स के करीब चले जाते थे और फिर अपना नाम न पुकारे जाने के कारण फिर इधर-उधर अपने स्थान पर लौट आते थे।

तभी सब लोगों की नजर सामने की ओर उठ गई। काले बुर्के की ओर से चांद जैसा सुंदर चेहरा झलका। मैंने भी अपनी नजरें उस बुर्के वाली की चेहरे पर टिका दिया। काश! एक झलक और मिल पाती! मेरे साथ और लोगों के मन में भी शायद यही भाव उठे हो। सभी लोग टकटकी लगाए उस महिला को देखे जा रहे थे। लोगों के मनोभावना शीघ्र ही पूर्ण हुई। उस महिला ने अपना बुर्का वाला लबादा शरीर से निकाला और अलग कर दिया था। हाय! कितनी सुंदर हैं। मैंने भी अपनी नजरें उर्वशी के चेहरे पर जमा दी थी। झील से भी सुंदर और गहरी आंखें, गुलाब के समान सुंदर कपोल,सुतवा नाक, उफ! ओठ के कहने क्या। छोटी पतली गुलाबी होठों को देखकर कई लोगों का मन मचल उठा। वह महिला अपने सास को डॉक्टर से दिखाने आई थी।

उस महिला के दो सुंदर फूल के समान प्यारे बच्चे थे। एक यही कोई पाँच साल का रहा होगा और दूसरी बच्ची तीन साल की रही होगी। तब तक मरीज के साथ आया एक नौजवान युवक उस बच्चे को गोद में उठाकर प्यार से उसकी मां पिताजी और भाई बहन का नाम पूछने लगा। सभी लोगों की नजरें अब उस महिला के साथ उस युवक पर भी थी। वह युवक उस रूपसी की ओर देख कर मुस्कुरा देता था और उसके फूल से बच्चों के को चूम लेता था। बहुत से लोग यह सब देख कर मन ही मन मुस्कुरा उठे और कुछ तो खुलकर इस का मजा भी लेने लगे। वह बच्चा युवक की गोद से निकलने के लिए छटपटा रहा था और वह युवक उस बच्चे को जबरदस्ती भीचे हुए था और आपने पास से कलम देकर उसे फुसलाने की कोशिश कर रहा था। अन्त में उस युवक को अपनी गोद से बच्चे को आजाद करना पड़ा क्योंकि बच्चा उसकी गोद में चीख-पुकार मचाने लगा था। बच्चा फिर से अपनी मां के पास पहुंच चुका था और वह युवक बाल प्रेम में खींचा हुआ उसकी मां के पास पहुँच गया।उस युवक ने एक बार फिर बच्चे को हाथ पकड़ कर अपनी ओर खींचा। उस बच्चे ने दूसरी हाथ से कस कर अपनी मां का पल्लू पकड़ लिया। उस रूपसी ने घूरकर उस युवक की ओर देखा। युवक मुस्कुरा दिया, वह रूपसी भी अपने आप को रोक न सकी, मुस्कुरा पड़ी। मैं उस युवक को देखकर सोच रहा था यह बाल प्रेम है या स्त्री प्रेम