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आंदोलनकारियों को एकजुट करने के लिए जिला सम्मेलन का आयोजन सम्मान दिलाने की मांग

आंदोलनकारियों को एकजुट करने के लिए जिला सम्मेलन का आयोजन सम्मान दिलाने की मांग

खूंटी जिला में आंदोलनकारियों को बराबरी का दर्जा देकर सम्मान दिलाने की मांग की जा रही है. झारखंड आंदोलनकारी मोर्चा की तरफ से आंदोलनकारियों को एकजुट करने के लिए जिला सम्मेलन का आयोजन किया गया. जिसमें अधिकार और सम्मान के लिए संघर्ष करने का संकल्प लिया गया.

खूंटी: झारखंड आंदोलनकारी मोर्चा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मांग की है कि बजट सत्र से पहले झारखंड आंदोलनकारी आयोग का गठन किया जाय ताकि कार्यकर्ताओं को चिन्हित करने के काम में तेजी आए. मोर्चा की संयोजक मंडली के मुमताज खान, प्रवीण प्रभाकर, विमल कच्छप, शफीक आलम और उमेश यादव ने स्थानीय डाक बंगला में एक प्रेस सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि दुर्भाग्य की बात है कि जिन आंदोलनकारियों के संघर्ष के बल पर अलग राज्य बना. वह आज दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं.
मोर्चा के नेताओं ने कहा कि खूंटी जिला झारखंड आंदोलन की जन्मभूमि है. यहीं बिरसा मुंडा और जयपाल सिंह मुंडा पैदा हुए लेकिन इस जिले के आंदोलनकारी बहुत उपेक्षित हैं और वह अपनी बात कहीं रख नहीं पा रहे हैं. इसलिए मोर्चा की तरफ से सबों को एकजुट करने के लिए जिला सम्मेलन का आयोजन किया गया. जिसमें अधिकार और सम्मान के लिए संघर्ष करने का संकल्प लिया गया. मोर्चा के नेताओं ने कहा कि आंदोलनकारियों को पहचान पत्र और नौकरियों में आरक्षण मिले पेंशन की राशि तीस हजार रुपये की जाए शहीदों की जीवनी पाठ्यक्रम में शामिल हो.
झारखंड आंदोलन में शहीद हुए निर्मल महतो, सुनील महतो, सुदर्शन भगत आदि को राजकीय शहीद का दर्जा देने के लिए प्रस्ताव पारित किया गया. झारखंड के शहीदों के नाम पर विभिन्न संस्थानों, विश्वविद्यालयों, स्कूलों, कालेजों, मुख्य सड़क, चौक और चौराहों का नामकरण करने के लिए भी प्रस्ताव पारित किया गया. सम्मेलन में यह भी मांग उठाई गई कि सभी आंदोलनकारियों को एक ही कैटेगरी में रखकर बराबरी का दर्जा दिया जाए. 1932 के खतियान या अंतिम सर्वे के आधार पर स्थानीय नीति बनाई जाए, 20 सूत्री और निगरानी समिति में आंदोलनकारियों को स्थान दिया जाए, पाठ्यक्रम में आंदोलनकारी और शहीदों की संघर्ष गाथा को शामिल किया जाए सभी वरिष्ठ आंदोलनकारियों को जिले के कार्यक्रम में अतिथि के रुप में आमंत्रित किया जाए और टोल टैक्स पर भी आंदोलनकारियों को छूट मिले.