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13.5 लाख लोगों को फाइलेरिया से बचाने की मुहिम

कुणाल सारंगी

गढ़वा को फाइलेरिया से मुक्त बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने पहल शुरू कर दी है. जिले में 10 से 20 अगस्त तक चलने वाले मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन कार्यक्रम की सभी तैयारी पूरी कर ली गई है. इसके तहत जिले के 13 लाख 49 हजार 205 लोगों को फाइलेरिया की दवा खिलाने का लक्ष्य रखा गया है.

गढ़वा: स्वास्थ्य विभाग ने जिले के करीब साढ़े 13 लाख लोगों को फाइलेरिया से ग्रसित होने से बचाने के लिए 10 अगस्त से 20 अगस्त तक अभियान चलाने का निर्णय लिया है. इसके तहत लोगों को डीईसी और एल्बेंडाजोल की गोली खिलाई जाएगी.
इस कार्यक्रम की सफलता के लिए जागरूकता रथ निकाला गया है. सिविल सर्जन डॉ एनके रजक और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी प्रवीण कुमार सिंह ने झंडी दिखाकर इसे रवाना किया. जागरूकता रथ जिले भर में घूमकर लोगों को फाइलेरिया के प्रति जागरूक करेगा. इसके लिए जिले भर में 1341 बूथ बनाए गए हैं. सभी बूथों के लिए कुल 3512 दवा वितरक नियुक्त किए गए हैं. इस कार्यक्रम के निगरानी के लिए 320 सुपरवाइजर बनाए गए हैं. इस अभियान के लिए एल्बेंडाजोल की 13 लाख 49 हजार 205 डीईसी की 33 लाख 73 हजार 11 गोली उपलब्ध कराई गई है.
10 अगस्त को लोगों को बूथों पर दवा दी जाएगी. उसके बाद शेष 10 दिनों तक घर-घर तक जाकर इन दवाओं को पहुंचाया जाएगा.
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी प्रवीण कुमार सिंह ने कहा कि जीरो से एक वर्ष तक के बच्चे, गर्भवती महिलाएं और गंभीर रोग से ग्रसित लोगों को कोई दवा नहीं दी जाएगी. इसके अलावा सभी उम्र के लोगों को एल्बेंडाजोल की एक-एक गोली दी जाएगी. जबकि दो से पांच वर्ष के बच्चों को डीईसी दवा की एक गोली, 6 से 14 वर्ष के लोगों को डीईसी दवा की दो गोली और 15 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को डीईसी दवा की तीन गोली दी जाएगी.
सिविल सर्जन डॉ एनके रजक ने कहा कि फाइलेरिया जानलेवा बीमारी नहीं है, लेकिन यह गंभीर बीमारी जरूर है. जिसे यह बीमारी लग जाती है उसे ठीक करना मुश्किल हो जाता है. यह बीमारी सेंट्रीफ्लाई मच्छड़ के काटने से होता है. इसका अंतिम मुकाम हाथी पांव होता है. जो किसी भी दवा से ठीक नहीं होता है. फाइलेरिया से बचने का एक मात्र उपाय बचाव ही है. जिसके लिए यह अभियान चलाया जा रहा है.